Ranchi News: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक, नौकरियों की खरीद-बिक्री के खिलाफ चल रही भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा का 11 सितंबर को रांची में समापन होगा. मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलनकारियों ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य प्रदेश की भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार सुनिश्चित करना है. प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए हुई.
देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में 24 जिला जागरूकता अभियान की शुरुआत 24 अगस्त को रामगढ़ के गोला प्रखंड स्थित नेमरा गांव से हुई थी. यात्रा हजारीबाग, चतरा, संथाल परगना, धनबाद, बोकारो, सिल्ली, कोल्हान प्रमंडल, गुमला और खूंटी समेत राज्य के सभी 24 जिलों से होकर गुजरी. इस दौरान छात्रों और अभिभावकों से संवाद कर भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए समर्थन जुटाया गया. यात्रा 10 सितंबर को रांची पहुंचेगी.
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11 सितंबर को यात्रा का समापन मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से होगा. यहां से यात्रा कोकर के डिस्टिलरी पुल स्थित धरती आबा बिरसा मुंडा के समाधि स्थल तक जाएगी. आंदोलनकारियों के अनुसार, 15 सितंबर के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति की घोषणा देवेंद्र नाथ महतो करेंगे.
आंदोलनकारियों ने कहा कि झारखंड में लगातार सामने आ रही भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य पर असर पड़ रहा है. उनका आरोप है कि पेपर लीक और सेटिंग-गेटिंग जैसी व्यवस्था के कारण योग्य अभ्यर्थी चयन से बाहर हो रहे हैं.
उन्होंने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई को बापू वाटिका से दीनबंधु मंडल और रामवतार महतो के नेतृत्व में हुई थी. इसके बाद 29 जुलाई को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्रों ने जुटकर संविधान मार्च निकाला था.
आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार के साथ हुई वार्ता से समाधान नहीं निकल सका. मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन न्यायालय से रोक लगने के कारण छात्रों को अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई है.
छात्रों की प्रमुख मांग पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की है. इसके अलावा पीजीटी, लैब असिस्टेंट, नगर पालिका, उत्पाद सिपाही और सीजीएल टेक्निकल समेत अन्य परीक्षाओं में भी कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग की गई है. आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने या उनके संबंध में उचित कार्रवाई करने का मुद्दा भी आंदोलनकारियों ने उठाया.
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