पानीपत रिफाइनरी के कर्मचारी भूख हड़ताल पर: पेयजल समेत 11 मांगों को लेकर गेट पर धरना; बोले-प्रबंधन हकों का हनन कर रहा - Panipat News
पानीपत11 घंटे पहले
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भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारी नारेबाजी करते हुए।
पानीपत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स (PRPC) बहोली में प्रबंधन और श्रमिक संगठन के बीच चल रहा गतिरोध जटिल होता जा रहा है। इंडियन ऑयल पानीपत रिफाइनरी एम्पलाइज यूनियन (IPREU) के बैनर तले रिफाइनरी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
दो दिनों से अन्न-जल त्याग कर धरने पर बैठे कर्मचारियों के कारण परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। इसी बीच यूनियन ने इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 के तहत रिफाइनरी हेड को हड़ताल का नोटिस थमाते हुए 11 सूत्रीय सप्लीमेंट्री मांगों का एक नया मांग पत्र भी सौंप दिया है।
दो दिन से भूखे पेट बैठे कर्मचारी, प्रबंधन के खिलाफ रोष
यूनियन के अध्यक्ष संपूर्ण सिंह और महासचिव मनोज कुमार के नेतृत्व में सैकड़ों गैर-कार्यकारी कर्मचारी रिफाइनरी परिसर में डटे हुए हैं। दो दिन से चल रही भूख हड़ताल के चलते कुछ कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ने की भी सूचना है।
वहीं, लेकिन यूनियन का साफ कहना है कि जब तक प्रबंधन उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक यह आंदोलन और तेज होगा। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन लगातार उनके हकों का हनन कर रहा है और पुराने समझौतों को ताक पर रख रहा है।
भूख हड़ताल के दौरान नारेबाजी करते हुए कर्मचारी।
मांग पत्र में उठाए गए ये 11 मुख्य मुद्दे
प्रमोशन पॉलिसी का उल्लंघन: यूनियन का आरोप है कि प्रबंधन 50:50 प्रमोशन पॉलिसी के त्रिपक्षीय समझौते को लागू नहीं कर रहा है, जिससे कर्मचारियों की पदोन्नति रुकी हुई है।
खाली पदों पर भर्ती न होना: रिफाइनरी और उसके सर्विस विभागों में स्वीकृत गैर-कार्यकारी पदों पर सालों से भर्तियां नहीं की गई हैं, जिससे मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ बढ़ गया है।
जूनियर ऑफिसर्स की नियुक्ति का विरोध: अप्रैल-मई 2025 के दौरान भर्ती किए गए E-0 स्तर के जूनियर ऑफिसर्स को PP-3 यूनिट में वर्कर्स के डोमेन (कार्यक्षेत्र) में तैनात करने का पुरजोर विरोध किया जा रहा है।
मेडिकल नियमों में बदलाव का विरोध: आश्रित माता-पिता के इलाज की मंजूरी यूनिट स्तर से हटाकर रीजनल हेडक्वार्टर (RHQ) करने और यात्रा प्रमाण पत्र अपलोड करने की शर्त से कर्मचारी परेशान हैं।
अस्पताल प्रबंधन में कमियां: रिफाइनरी अस्पताल में मेडिकल रेफरल, दवाओं की खराब गुणवत्ता और डायग्नोस्टिक लैब की लचर व्यवस्था को सुधारने की मांग की गई है।
टाउनशिप एस्टेट ऑफिस की बदहाली: कर्मचारियों के आवासों की मरम्मत और रखरखाव का काम समय सीमा के भीतर पूरा करने की मांग की गई है।
स्टेशनरी किट की बहाली: पूर्व में हुए समझौतों के तहत कर्मचारियों को दी जाने वाली स्टेशनरी किट सुविधा को दोबारा शुरू करने की मांग है।
रिफाइनरी डे पर तोहफों की सीमा हटाना: इंडियन ऑयल डे और रिफाइनरी डे पर मिलने वाले लाभों पर लगाई गई ₹3 हजार की अधिकतम सीमा को हटाने और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई है।
टाउनशिप में आवारा कुत्तों का आतंक: रिफाइनरी टाउनशिप में कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या का स्थाई समाधान करने की मांग है।
पीने के गंदे पानी की समस्या: रिफाइनरी और टाउनशिप में आ रहे खराब गुणवत्ता वाले पीने के पानी की समस्या को दूर करने के लिए एक समर्पित आरओ (RO) वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग की गई है।
विद्युत रखरखाव विभाग में असुरक्षित कार्य पद्धतियां: PNPC इलेक्ट्रिकल में स्टाफ की भारी कमी के कारण असुरक्षित तरीके से काम करवाया जा रहा है, जिससे हादसों का डर बना हुआ है।
आर-पार के मूड में यूनियन
यूनियन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये सप्लीमेंट्री मांगें उनके पहले से चल रहे औद्योगिक विवाद और हड़ताल नोटिस का एक अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने इस नोटिस की प्रतियां सहायक श्रम आयुक्त (ALC) करनाल और सीजीएम को भी भेजी हैं। कर्मचारियों के दो दिवसीय भूख हड़ताल पर रहने के कारण रिफाइनरी के उत्पादन और मेंटेनेंस कार्यों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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