मानकों पर फेल पाई गई दवाओं में बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, बुखार-खांसी के साथ-साथ हार्ट, किडनी, पेट, आंखों की दवाएं और विटामिन इंजेक्शन तक शामिल हैं। संबंधित फेल बैचों की बिक्री व वितरण को रोकते हुए बाजार में जा चुके स्टॉक को वापस मंगाने (Recall) की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पंजाब और हिमाचल प्रदेश में बनी 71 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर हुए फेल, हरियाणा की 11 दवाओं के सैंपल फेल।
- Published: 23 Sep 2026, 01:00 PM IST
- Last Updated: 23 Sep 2026, 01:00 PM IST
हरियाणा की 11 दवाओं के सैंपल फेल: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अगस्त महीने के ड्रग अलर्ट में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में बनी 71 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। वहीं, देशभर की फार्मा इंडस्ट्री की कुल 221 दवाओं के नमूने जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे।
फेल हुए नमूनों में बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, बुखार और खांसी की दवाओं के अलावा हार्ट, पेट, किडनी और आंखों से जुड़ी दवाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा इंजेक्शन और विटामिन उत्पादों के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश की 63 और पंजाब की 8 दवाएं हुई फेल
CDSCO के ड्रग अलर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश की 63 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, जबकि पंजाब की 8 दवाएं गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
अन्य राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड की 39, गुजरात की 17, महाराष्ट्र की 16, मध्य प्रदेश की 12, तमिलनाडु और हरियाणा की 11-11, सिक्किम और उत्तर प्रदेश की 9-9 दवाओं के नमूने फेल पाए गए।
कुल 221 दवाओं में से 191 नमूनों की जांच स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्रीज, जबकि 29 नमूनों की जांच केंद्रीय प्रयोगशालाओं में की गई।
हिमाचल के कई औद्योगिक क्षेत्रों में बनी दवाएं
हिमाचल प्रदेश में गुणवत्ता जांच में फेल हुई दवाओं का निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित दवा इकाइयों में हुआ है। सैंपल फेल होने के बाद संबंधित दवा कंपनियों और निर्माण इकाइयों की गुणवत्ता व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
स्टेट ड्रग कंट्रोलर ने कंपनियों को दिया कारण बताओ नोटिस
हिमाचल के स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, जिन कंपनियों के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के साथ नियमों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कंपनियों से जवाब मांगा गया है। बाजार में भेजे जा चुके संबंधित बैचों का स्टॉक वापस मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
दवाओं की गुणवत्ता जांच पर बढ़ा फोकस
ड्रग अलर्ट में बड़ी संख्या में दवाओं के सैंपल फेल होने के बाद दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर निगरानी बढ़ाने पर जोर है। संबंधित विभागों की ओर से फेल बैचों की बिक्री रोकने और बाजार से स्टॉक वापस लेने की कार्रवाई की जा रही है।
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