भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी मामले में ईडी की जांच तेज:जेपीएससी में एक एजेंट के 11 अभ्यर्थी पीटी पास हुए, वसूले गए 1.10 करोड़
रांची17 मिनट पहले
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भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी मामले में अब ईडी ने भी तेज की जांच, जांच एजेंसी को शक...100 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध वसूली संभव जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर अब ईडी भी रेस हो गई है। सीआईडी थाना रांची में दर्ज कांड संख्या 16/2026 के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क के वित्तीय साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की ओर बढ़ रही है। इस मामले में अवैध उगाही का दायरा काफी बड़ा हो गया है।
आरोपियों के बयानों से भी पता चला है कि यह घोटाला 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का हो सकता है। गिरोह ने भर्ती के लिए बाकायदा रेट कार्ड तय था। पीटी पास कराने की एवज में अभ्यर्थियों से पांच लाख और अंतिम चयन के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपए तय थी। एक आरोपी बुधेश्वर भगत ने भी कबूला था कि 14वीं जेपीएससी पीटी के लिए उसने 24 अभ्यर्थियों की सूची अभय कुमार तिवारी को सौंपी थी। इनमें 10-10 लाख रुपए देने वाले 11 अभ्यर्थियों ने पीटी पास की थी। इस तरह सिर्फ एक एजेंट के जरिए 1.10 करोड़ की वसूली की गई। सीआईडी की केस डायरी में भी दर्ज है कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं के दौरान संबंधित बैंक खातों में भी भारी रकम जमा कराई गई थी।
हाईकोर्ट को सौंपे शपथ पत्र में झारखंड सरकार ने भी कहा है-50 लाख से 1 करोड़ रुपए में बेची गई नौकरी उधर, राज्य सरकार ने भी हाईकोर्ट में दायर शपथ पत्र में कहा है कि आयोग के जरिए द्वितीय श्रेणी के पदों को 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक में बेचा जा रहा था। 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के तहत 342 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। अगर प्रति पद 50 लाख से एक करोड़ रुपए के औसत लेनदेन के आंकड़ों को देखा जाए तो सिर्फ इस परीक्षा में ही वसूली का आकार 171 करोड़ से 342 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। हालांकि कितने पदों पर सेटिंग हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। इसके अलावा जेपीएससी की अन्य परीक्षाओं में भी इसी गिरोह की संलिप्तता पाई गई। जांच एजेंसी अब इन्हीं वित्तीय लेनदेन के सबूत को आधार बनाकर जांच आगे बढ़ा रही है।
जेपीएसससी के पूर्व अध्यक्ष समेत 15 आरोपियों पर ईडी का शिकंजा ईडी ने अपनी ईसीआईआर में सीआईडी द्वारा नामजद आयोग के अधिकारियों, मुख्य साजिशकर्ताओं, परीक्षा एजेंसी के कर्ता-धर्ता और बिचौलियों पर शिकंजा कस रही है। ईडी ने पोड़ैयाहाट के बीएसओ व टीडीपएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी को सिंडिकेट का मुख्य सरगना माना है। नियमों को दरकिनार कर टीडीपीएल को काम सौंपने वाले जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते को भी आरोपी बनाया है। वहीं उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह व रामवीर सिंह, कर्मचारी मो. उस्मान, मो. अवध व प्रदीप कुमार सिंह, एजेंट बुधेश्वर भगत व उमेश कुमार, मनोज तिर्की और सोनू कुमार, बिनसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक अरुण शर्मा को आरोपी बनाया गया है।
सीआईडी की ओर से जुटाए गए सबूत मनी लॉन्ड्रिंग केस की मजबूत नींव सीआईडी द्वारा जुटाए गए साक्ष्य ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस की बने मजबूत आधार बना रहा है। इसमें एजेंसी टीडीपीएल के आवासीय परिसर से जब्त चार कंप्यूटरों में से एक में वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ) मेन्स परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिका पाई गई, जो आयोग के बाहर कभी नहीं जानी चाहिए थी। इसके अलावा आंसर-की को पेन-ड्राइव या हार्ड-डिस्क के सुरक्षित माध्यम की बजाय वॉट्सएप पर भेजने का डेटा, ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में अंकों की हेराफेरी तथा टीडीपीएल की सहयोगी फर्म पिकर टेक्नोलॉजी के जरिए क्लाउड सर्वर पर डेटा एडिट किए जाने के तकनीकी साक्ष्य ईडी के जांच के दायरे में हैं। तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा नष्ट किए गए लैपटॉप के फॉरेंसिक विश्लेषण से डिलीट किए गए डेटा को भी लेकर ईडी जांच करने की तैयारी में है।
इन धाराओं के तहत दर्ज है केस... सीआईडी थाना रांची में बीएनएस की धारा 316(2), 316(5), 318(4)/318(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की धारा 12(2) व 12(3) के तहत केस दर्ज है। धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी ये धाराएं धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ के दायरे में आती हैं, जिससे ईडी इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की ओर बढ़ रही है।
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