105 Year Old Man Murder Case Relief: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराये गये व्यक्ति को 105 साल की उम्र में बड़ी राहत दी. देश की सबसे बड़ी अदालत ने रसिक चंद्र मंडल को शुक्रवार को राहत देते हुए वर्ष 2024 में उसे दी गयी जमानत को ही अंतिम आदेश करार दे दिया.
1988 के मर्डर केस में 1994 में हुई थी सजा
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वर्ष 1920 में जन्मे मंडल को वर्ष 1988 में हुई हत्या के एक मामले में वर्ष 1994 में 68 वर्ष की उम्र में दोषी ठहराया गया था. वह 29 नवंबर, 2024 तक जेल में था. तभी शीर्ष अदालत ने उसे जमानत दी थी.
38 साल पुराने क्रिमिनल केस की पूरी टाइमलाइन
- 1920 में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में रसिक चंद्र मंडल का जन्म हुआ.
- 1988 में मालदा में हुई हत्या के एक मामले में मंडल को मुख्य आरोपी बनाया गया.
- 1994 में 68 वर्ष की आयु में ट्रायल कोर्ट ने रसिक चंद्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी.
- 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज की. सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका खारिज हो गयी.
- 2020-21 में 99 वर्ष की आयु में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए मंडल ने सुप्रीम कोर्ट में समय से पहले रिहाई की गुहार लगायी. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया.
- 2024 में 105 वर्ष की उम्र में शीर्ष अदालत ने स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया.
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रसिकलाल की बाकी सजा सुप्रीम कोर्ट ने की माफ
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि याचिकाकर्ता की उम्र को देखते हुए मामले को बंद किया जा रहा है. यदि कोई शेष सजा बाकी है, तो उसे माफ किया जाता है.
अब नहीं होगी मंडल की गिरफ्तारी
चीफ जस्टिस ने कहा कि भले ही उम्रकैद की सजा पूरी नहीं हुई हो, फिर भी मंडल को दोबारा हिरासत में नहीं लिया जायेगा. पीठ ने 2024 के अंतरिम जमानत आदेश को पूर्ण और अंतिम करार दिया. अंतरिम जमानत देते समय शीर्ष अदालत ने मंडल की उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का भी उल्लेख किया था.
अंतरिम आदेश के तौर पर, हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता रसिक चंद्र मंडल को मौजूदा रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान अंतरिम जमानत/पैरोल पर रिहा किया जाये, और इसके लिए शर्तें निचली अदालत तय करेगी. -सुप्रीम कोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
वर्ष 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने हत्या मामले में दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली मंडल की अपील खारिज कर दी थी. इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, यहां भी उसकी याचिका खारिज हो गयी.
99 साल की उम्र में स्वास्थ्य के आधार पर लगायी रिहाई की गुहार
वर्ष 2020 में 99 वर्ष की उम्र में मंडल ने अधिक उम्र और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई के लिए याचिका दायर की थी. मई 2021 में उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था.