विश्व खाद्य दिवस पर जारी आंकड़ों से पता चला है कि जहां 64.5 करोड़ लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं, वहीं हर साल 105 करोड़ टन भोजन बर्बाद होता है।

भुखमरी और भोजन बर्बादी की चौंकाने वाली तस्वीर (सांकेतिक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर जारी आंकड़ों ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बर्बादी की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। एक ओर जहां दुनिया भर में 64.5 करोड़ लोग भुखमरी और गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हर साल 105 करोड़ टन भोजन कचरे में फेंक दिया जाता है।
प्रति व्यक्ति बर्बादी में मालदीव सबसे ऊपर
आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया का हर नागरिक औसतन सालाना 132 किलो खाना बर्बाद कर रहा है। देशों की बात करें तो मालदीव में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां प्रति व्यक्ति सालाना 260 किलो भोजन बर्बाद होता है। इसके विपरीत, स्पेन ने इस दिशा में मिसाल कायम की है, जहां सबसे कम प्रति व्यक्ति 39 किलो खाना बर्बाद होता है।
सबसे बड़ा हिस्सा घरों का
सालाना 105 करोड़ टन बर्बादी में सबसे बड़ा हिस्सा हमारे घरों का है:
घरों से: 63.1 करोड़ टन (कुल बर्बादी का 60%)
खाद्य सेवाओं (रेस्तरां/होटल) से: 29 करोड़ टन (28%)
खुदरा दुकानों से: 13.1 करोड़ टन (12%)
इसके अतिरिक्त, कुल उत्पादित भोजन का 13% हिस्सा खेत से दुकानों और बाजारों तक पहुंचने से पहले ही शुरुआती चरणों में खराब हो जाता है। इसका मतलब यह है कि 140 करोड़ हेक्टेयर उपजाऊ जमीन पर उगाया गया भोजन बिना किसी के पेट में गए बर्बाद हो जाता है, जिससे शुरुआती स्तर पर ही 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान होता है।
90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बर्बाद
यदि बर्बाद हुए इस भोजन को ट्रकों में भरा जाए, तो 5.25 करोड़ ट्रकों की आवश्यकता होगी। इन ट्रकों की कतार इतनी लंबी होगी कि यह पूरी पृथ्वी के 20 चक्कर लगा सकती है। इस विशाल अपव्यय से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल 90 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का आर्थिक झटका लग रहा है।
अफ्रीका और एशिया में भुखमरी का संकट
जहां भोजन बर्बाद हो रहा है, वहीं दुनिया की 7.8% आबादी (2025 तक) भुखमरी की शिकार है। वर्ष 2019 की तुलना में भूखे लोगों की संख्या में 6.1 करोड़ का इजाफा हुआ है। अफ्रीका में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां हर 5 में से 1 व्यक्ति कुपोषित है।
आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीका में 30.9 करोड़, एशिया में 29.2 करोड़ और लैटिन अमेरिका व कैरिबियन क्षेत्रों में 3.2 करोड़ लोग भुखमरी में जीने को मजबूर हैं।