
पेपर लीक रोकने की सिफारिशों का क्या हुआ?
पेपर लीक मुद्दे से जुड़ी आज 25 जुलाई 2026 को बड़ी खबर आई. बीते 35 दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे नीट परीक्षा में अनियमिता के खिलाफ प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र पीएम नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की रात में एक वीडियो संदेश जारी कर छात्रों को भरोसा दिलाया था कि सरकार इस मामले में कड़े कदम उठाने जा रही है. इस मामले में सरकार ने अभी तक पेपर लीक को रोकने के लिए बने 2 साल पहले वाले कानून में संसोधन को मंजूरी दे दी है और 27 जुलाई को पेपर लीक रोकने के लिए नया बिल संसद में पेश करने जा रही है, लेकिन इन सब के बीच एक पुराना सवाल फिर सामने आ गया है. 2024 में NEET-UG और UGC-NET विवाद के बाद बनी डॉ. के. राधाकृष्णन कमेटी ने जो 101 सुझाव दिए थे, उनका आखिर क्या हुआ? सरकार की ओर से उन पर कितना अमल किया गया और आने वाले नए नियमों में उनको किस तरीके से और कितना शामिल किया जाएगा. आइए इन सभी सवालों का जबाव तलाशने की कोशिश करते हैं.
केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे से पहले ही सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में बदलाव करने को मंजूरी दे दी थी. मसौदे में प्रमुख बदलाव क्या होंगे उसकी जानकारी भी बाहर आई है. मिसाल के तौर पर सजा के लेकर जुर्माने तक के निमय सरकार सख्त करने जा रही है. तो कमेटी की रिपोर्ट और सरकार ने उस पर कितना ध्यान दिया उसे जानने से पहले नए मसौदे के बारे में भी जान लेते हैं.
- सजा- अभी 3-5 साल की जेल का प्रावधान है. इसे बढ़ाकर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल किया जा सकता है.
- जुर्माना- न्यूनतम जुर्माना 10 लाख रुपय से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है.
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट- पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए अलग अदालतें बनेंगी, जो तीन महीने के भीतर जांच और फैसला पूरा कर सकेंगी.

राधाकृष्णन कमेटी के बड़े सुझाव क्या थे?
साल 2024 में जब NEET-UG का पेपर लीक हुआ था तो उसके बाद ही केंद्र सरकार ने पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी. इस कमेटी ने 21 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसमें कुल 101 सुझाव दिए गए थे. ये सुझाव परीक्षा सिस्टम, डेटा सिक्योरिटी, NTA में सुधार, परीक्षा की निष्पक्षता, छात्रों की मदद और टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल से जुड़े थे. इन सुझावों का मकसद सिर्फ सजा बढ़ाना नहीं था, बल्कि पेपर लीक होने से पहले ही उसे रोकना था. सुझाव में प्रमुख बातें-
- NTA में बड़ा सुधार- एजेंसी के एडमिन और टेक सिस्टम को मजबूत किया जाए, ताकि वह सिर्फ प्रवेश परीक्षाओं पर फोकस कर सके.
- सिक्योर डिजिटल पेपर डिलीवरी- प्रश्नपत्र सेंटर तक पूरी तरह सुरक्षित डिजिटल तरीके से पहुंचे.
- कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम (CBT)- बड़े एग्जाम धीरे-धीरे ऑफलाइन पेपर की जगह CBT मोड में कराए जाएं, ताकि लीक की संभावना कम हो.
- प्राइवेट परीक्षा केंद्रों पर कंट्रोल- जहां निगरानी कमजोर रहती है, वहां निजी सेंटरों का इस्तेमाल कम किया जाए.
- अलग सिक्योरिटी विंग और साइबर सिक्योरिटी- NTA के भीतर ऐसा सिस्टम बने जो शुरुआत में ही किसी लीक की आशंका पकड़ सके.
- मजबूत शिकायत सिस्टम- छात्रों की शिकायतों पर जल्दी और साफ तरीके से कार्रवाई हो.

दो साल बाद भी कई बड़े सुझाव अधूरे
यहीं से कहानी थोड़ा दिलचस्प हो जाती है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ज्यादातर सुझाव लागू कर दिए गए हैं. लेकिन कोर्ट में यह भी साफ हुआ कि परीक्षा अभी पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड नहीं हुई है. यानी सबसे बड़ा सिस्टम सुधार अब भी अधूरा है. मार्च 2025 में दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय कमेटी ने भी सरकार और NTA को राधाकृष्णन कमेटी के सुझाव जल्द लागू करने की सलाह दी थी. लेकिन इस पर कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया. 2025 का NEET बिना किसी बड़े विवाद के हो गया, तो माना गया कि सिस्टम ठीक हो गया है. लेकिन 2026 में फिर पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगीं, जिसके बाद सरकार को फिर उसी रिपोर्ट की तरफ देखना पड़ा. हालांकि, सरकार ने कहा है कि अगली बार से नीट की परीक्षा सीबीटी मोड पर होगी, लेकिन अभी भी कई सुधार बाकी हैं.
लगातार लीक हो रहे एग्जाम
देश में बीते कुल सालों में कई एग्जाम लीक हुए हैं. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि बीते 10 सालों में देश में 150 से ज्यादा पर्चे लीक हुए और उनके आरोपियों में अभी तक किसी को सजा नहीं मिल पाई है. इस बीच साल 2024 में हुई नीट यूजी परीक्षा को लेकर कराने का मुख्य आरोपी भी छूट गया. CBI ने सबूतों के अभाव में उसे क्लीन चिट दे दी. ऐसे समय में नए बिल और कमेटी के सुझावों पर चर्चा और भी प्रासंगिक हो जाती है.
सजा बढ़ेगी या सिस्टम बदलेगा?
27 जुलाई को पेश होने वाले बिल और राधाकृष्णन कमेटी के सुझावों में सबसे बड़ा फर्क सजा बढ़ने और सिस्टम बदलने को लेकर ही है. बिल का फोकस सख्त सजा और भारी जुर्माने के जरिए सख्त कार्रवाई करने पर है. जबकि कमेटी का फोकस ऐसा सिस्टम बनाने पर था, जिसमें पेपर लीक होने का मौका ही न मिले. इसके लिए CBT, सिक्योर डिजिटल पेपर डिलीवरी और NTA में बड़े सुधार जैसे सुझाव दिए गए थे. अब तक सामने आई जानकारी में फास्ट-ट्रैक कोर्ट, ज्यादा सजा और भारी जुर्माने का जिक्र है. लेकिन परीक्षा केंद्रों में बदलाव, पेपर डिलीवरी का नया सिस्टम साफ तौर पर नजर नहीं आता है. हालांकि, पेपर लीक और परीक्षा विवादों के बीच केंद्र सरकार ने NTA पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है, कुछ के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की तैयारी है. कुल मिलाकर कार्रवाइयों का दौर शुरू हो गया है अब देखना होगा कि सरकार नियमों में संशोधन करके किस तरीके से उसे जमीन पर लागू करवाती है, जिससे भविष्य में पर्चा लीक की घटनाएं न हों.
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देवेश कुमार पांडेय
देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है. साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.
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