पूर्वी हिमालय में स्थित ग्लॉव झील अरुणाचल प्रदेश की पहली और भारत की 101वीं रामसर साइट बन गई है, जो इसकी प्राचीन सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता को वैश्व ...और पढ़ें

अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत ग्लॉ झील बनी देश की 101वीं रामसर साइट(फोटो: सोशल मीडिया)
HighLights
ग्लॉव झील अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट बनी।
भारत की कुल रामसर साइटों की संख्या अब 101 हुई।
झील समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय लोककथाओं से जुड़ी है।
डिजिटल डेस्क, ईटानगर। पूर्वी हिमालय की गहराइयों में छिपी ग्लॉव झील अपनी प्राचीन सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के लिए हमेशा से ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र रही है। यह छिपा हुआ रत्न अब भारत की 101वीं रामसर साइट बन गया है। इसके साथ ही, यह इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को प्राप्त करने वाला अरुणाचल प्रदेश का पहला आर्द्रभूमि क्षेत्र बन गया है।
यह मान्यता इस हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करती है और राज्य के इस कम-ज्ञात पर्यटन स्थल की ओर दुनिया का ध्यान खींचती है, जहां घने जंगल, विविध वन्यजीव और दिलचस्प स्थानीय लोककथाएं मिलकर एक अनूठा अनुभव प्रदान करती हैं।
-1785868063722.jpg)
क्या है रामसर साइट?
रामसर साइट एक ऐसी आर्द्रभूमि है जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व का माना जाता है। इस अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि को 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था और यह 1975 में लागू हुई थी।
यह कन्वेंशन देशों को आर्द्रभूमि के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण व टिकाऊ उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। आर्द्रभूमियों को उनके पारिस्थितिक मूल्य, अनूठी विशेषताओं या जैव विविधता के संरक्षण में उनके महत्व के कारण रामसर साइट घोषित किया जाता है।
-1785868073785.jpg)
अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से ग्लॉव झील को भारत की 101वीं रामसर साइट के रूप में नामित करने की आधिकारिक घोषणा की।
इसे एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए, उन्होंने कहा कि इस मान्यता से जैव विविधता संरक्षण, जल व जलवायु सुरक्षा और स्थायी आजीविका को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आर्द्रभूमि संरक्षण में भारत की प्रगति पर भी प्रकाश डाला और बताया कि देश में रामसर साइट्स की संख्या जो 2014 में 26 थी, वह बढ़कर आज 101 हो गई है।
क्या है ग्लॉव झील की खासियत?
बारहमासी पहाड़ी जलधाराओं से पोषित, ग्लॉव झील हरे-भरे जंगलों और वनस्पतियों से घिरी हुई है। इस साइट और इसके जलग्रहण क्षेत्र में पेड़ की 150 से अधिक प्रजातियां और ऑर्किड की 49 प्रजातियां दर्ज की गई हैं।
वाकरो से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित इस झील तक केवल ट्रेकिंग के जरिए ही पहुंचा जा सकता है। यह इसे अरुणाचल प्रदेश में रोमांच और शांति की तलाश करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद आकर्षक स्थल बनाता है।
यह झील कमलांग वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है, जो हाथी, तेंदुआ बिल्ली, जंगली सूअर, सिवेट, हिरण, विशाल गिलहरी और उड़न गिलहरी सहित विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों का घर है। पर्यटक यहां पास ही स्थित एक श्रद्धेय तीर्थ स्थल, परशुराम कुंड के भी दर्शन कर सकते हैं।

स्थानीय लोककथाएं का रहस्य
अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, ग्लॉव झील स्थानीय लोककथाओं और रहस्यमयी कहानियों से भी गहराई से जुड़ी हुई है। एक ब्लॉग में अपना अनुभव साझा करने वाली यात्री आकांक्षा सिवाच के अनुसार, मिशमी जनजाति के लोगों का मानना है कि इस झील में चार देवता दो लड़कियां और दो लड़के निवास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये संरक्षक आत्माएं झील और यहां आने वाले लोगों की रक्षा करती हैं।
स्थानीय मान्यता यह भी है कि ग्लॉव झील में कोई डूब नहीं सकता। एक और दिलचस्प कहानी यह है कि घने जंगलों से घिरे होने के बावजूद, झील की सतह पर पत्तियां, टहनियां और अन्य प्राकृतिक मलबा कभी नहीं टिकता और यह पानी हमेशा साफ रहता है।
ब्लॉग में आगे बताया गया है कि पहली बार आने वाले पर्यटकों का स्वागत अक्सर हल्की बारिश से होता है, फिर चाहे मौसम कैसा भी हो। हालांकि ये कहानियां स्थानीय परंपरा का हिस्सा हैं और वैज्ञानिक रूप से सत्यापित नहीं हैं, लेकिन ये इस एकांत हिमालयी गंतव्य के रहस्य को और भी गहरा कर देती हैं।
ग्लॉव झील घूमने का सबसे अच्छा समय
ग्लॉव झील की यात्रा करने का आदर्श समय अक्टूबर से अप्रैल के बीच है। इस दौरान यहां का मौसम सुहावना होता है, जिससे ट्रेकिंग और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेना काफी आरामदायक हो जाता है।