गया जिले के बेलागंज प्रखंड स्थित प्रसिद्ध बाबा कोटेश्वर नाथ धाम में सावन की अंतिम पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु सहस्त्रलिंगी महादेव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना में जुटे हैं। प्राचीन शिव मंदिर में सावन की पूर्णिमा के अवसर पर विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है।
सहस्त्रलिंगी महादेव के दर्शन का विशेष महत्व
मेन गांव स्थित बाबा कोटेश्वर नाथ धाम अपनी अनोखी धार्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग पर 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिन्हें सहस्त्रलिंगी महादेव के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां एक शिवलिंग की पूजा करने से हजार शिवलिंगों की आराधना का पुण्य प्राप्त होता है।
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पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है मंदिर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में शोणितपुर के राजा बाणासुर की पुत्री उषा ने भगवान शिव की आराधना के लिए इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव की कृपा से उनकी मनोकामना पूर्ण हुई। तभी से यह स्थान शिव भक्ति और आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में माना जाता है।
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बाबा कोटेश्वर नाथ धाम मोरहर और दरधा नदी के संगम के पास स्थित है। संगम स्थल पर होने के कारण इस स्थान का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं, सावन की अंतिम पूर्णिमा के दिन विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया जाता है।
मंदिर का गर्भगृह प्राचीन लाल पत्थरों से निर्मित है, जो इसकी ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है। मंदिर परिसर में स्थित विशाल पीपल का वृक्ष भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह वृक्ष काफी प्राचीन है और इससे जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सावन की अंतिम पूर्णिमा पर बाबा कोटेश्वर नाथ धाम में भक्तों की आस्था देखते ही बन रही है। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ से सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
मन को मिलती है शांति
कुंदन कुमार कहते हैं, ''बाबा कोटेश्वर नाथ धाम में लोगों की अटूट आस्था है। सावन में यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रहती है। यहां स्थित 1008 शिवलिंगों वाले अद्भुत शिवलिंग के दर्शन करने से मन को अपार शांति मिलती है। बाबा से जो भी सच्चे मन से मांगा जाता है, वह अवश्य पूरा होता है। मैं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना लेकर आया हूं।''
सच्चे मन से मांगने पर पूरी होती हैं मनोकामनाएं
सुजीत कुमार कहते हैं, ''मैं पहले भी बाबा के दरबार में आता रहा हूं। इस बार बेटी के जन्म के बाद उसका आशीर्वाद दिलाने आया हूं। बाबा कोटेश्वर नाथ से जो भी सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।'' महिला श्रद्धालु अंशु कुमारी कहती हैं, ''मैं पहली बार बाबा कोटेश्वर नाथ धाम आई हूं। यहां के बारे में सुना था कि भोलेनाथ से सच्चे मन से जो भी मांगा जाता है, वह जरूर पूरा होता है। इसी आस्था के साथ बाबा के दर्शन करने पहुंची हूं।''
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यहां से कोई श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता
मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश त्रिपाठी कहते हैं कि बाबा कोटेश्वर नाथ धाम अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है। यहां एक ही शिवलिंग में 1008 महादेव विराजमान हैं, जो इसे देशभर में विशेष पहचान दिलाता है। मंदिर परिसर में तीसरी से 12वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमाएं मौजूद हैं। अग्निदेव और कामदेव सहित पूरे गांव में 11 प्राचीन शिवलिंग स्थापित हैं।
उन्होंने बताया कि इस स्थान का प्राचीन नाम शिवनगर था, जिसे अंग्रेजों ने बदलकर 'मेन' कर दिया। सावन के महीने में श्रद्धालु पटना से गंगाजल लाकर यहां जलाभिषेक करते हैं। न्यायपालिका के कई न्यायाधीशों के साथ ही देश-विदेश, विशेषकर नेपाल और भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि बाबा के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता और सच्चे मन से की गई प्रार्थना पूरी होती है।

कोटेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु

कोटेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की गई।

कोटेश्वर महादेव मंदिर के पास मौजूद श्रद्धालु