August 17, 2026

मध्यप्रदेश के टीचर्स को हाईकोर्ट से बड़ी राहत की उम्मीद: 100 प्रतिशत वेतन के मामले में फैसला सुरक्षित, 7 प्रतिशत ब्याज सहित मिल सकती है बकाया राशि

MP Teacher 100 Percent Salary Case: मध्यप्रदेश के टीचर्स को 100 प्रतिशत वेतन मिलने की उम्मीद है। हाईकोर्ट ने स्कूल और ट्राइबल शिक्षा विभाग के हायर सेकंडरी, सेकंडरी और प्राइमरी टीचर्स को परिवीक्षा अवधि के दौरान 70%, 80% और 90% वेतन की जगह 100 प्रतिशत वेतन देने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब टीचर्स को फैसले का इंतजार है, क्योंकि अगर फैसला उनके पक्ष में आता है तो पूरे वेतन के साथ 7 प्रतिशत ब्याज सहित बकाया राशि मिल सकती है।

जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने की सुनवाई

सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता धीरज तिवारी ने पक्ष रखा और 70-80-90 प्रतिशत वेतन व्यवस्था के विरुद्ध कानूनी और संवैधानिक आधारों पर विस्तृत दलीलें पेश कीं।

नियमित नियुक्ति तो फिर कम वेतन क्यों ?

याचिकाकर्ताओं की ओर से न्यायालय के समक्ष कहा गया कि संबंधित शिक्षक किसी अस्थायी और मानदेय व्यवस्था के अंतर्गत नियुक्त नहीं हुए हैं, बल्कि निर्धारित पात्रता परीक्षा और नियमित चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्वीकृत नियमित पदों पर नियुक्त किए गए हैं। इसके बावजूद परिवीक्षा अवधि के पहले साल में 70 प्रतिशत, दूसरे साल में 80 प्रतिशत और तीसरे साल में 90 प्रतिशत वेतन दिया गया, जबकि उनसे नियमित शिक्षकों के समान पूर्ण कार्य और दायित्वों का निर्वहन कराया गया।

काम एक जैसा तो वेतन क्यों रोका ?

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि जब कार्य, दायित्व और जिम्मेदारियां समान हैं, तब केवल परिवीक्षा अवधि के आधार पर वेतन का एक हिस्सा रोकना समानता के संवैधानिक सिद्धांत एवं समान कार्य के लिए समान वेतन की अवधारणा के विपरीत है। यह भी कहा गया कि विधिवत चयनित एवं नियमित पद पर नियुक्त कर्मचारी को स्टाइपेंड या घटे हुए वेतन की व्यवस्था में रखना उचित नहीं है।

hc mp
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

हाईकोर्ट में दिया गया पहले के फैसलों का हवाला

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता धीरज तिवारी ने न्यायालय के समक्ष समान प्रकृति के पहले के फैसलों और 12 दिसंबर 2019 के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र से संबंधित न्यायिक फैसले का भी हवाला दिया। याचिका में ये भी आधार लिया गया है कि परिपत्र और परिवीक्षा अवधि के दौरान घटे हुए वेतन की व्यवस्था का प्रश्न पूर्व में न्यायिक परीक्षण से गुजर चुका है। याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट से वर्तमान मामले में भी समान न्यायिक संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई।

100% वेतन के साथ पूरा एरियर और 7% ब्याज की मांग

याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट से मांग की गई कि परिवीक्षा अवधि में 70%, 80% एवं 90% वेतन दिए जाने के कारण रोकी गई संपूर्ण अंतर राशि का भुगतान करते हुए कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही पहले, दूसरे और तीसरे साल के दौरान रोकी गई बकाया वेतन राशि पर राशि देय होने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिए जाने की भी मांग की गई है।

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हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

याचिका में 24 दिसंबर 2019 और 24 फरवरी 2020 की अधिसूचनाओं के तहत लागू स्टाइपेंड आधारित परिवीक्षा व्यवस्था और 12 दिसंबर 2019 के संबंधित परिपत्र के आधार पर हुई वेतन कटौती को चुनौती देते हुए पूरा वेतन और सभी परिणामी आर्थिक लाभ देने का निवेदन किया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर सार्थक बहस हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

7 प्रतिशत ब्याज सहित मिल सकती है बकाया राशि

ये मामला प्रदेश के ट्राइबल शिक्षा विभाग एवं स्कूल शिक्षा विभाग में 70-80-90 प्रतिशत वेतन व्यवस्था से प्रभावित उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अगर याचिकाकर्ताओं की मांग स्वीकार होती है तो प्रभावित शिक्षकों के लिए 100 प्रतिशत वेतन के साथ बकाया अंतर राशि और उस पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलने का रास्ता खुल सकता है।