सच्ची घटना पर आधारित वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar) को बनाने में मेकर्स ने कितनी मेहनत की है, इस बारे में उन्होंने खुलासा किया है।

ऑपरेशन सफेद सागर की खास बातें। फोटो क्रेडिट- एक्स

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कारगिल युद्ध (Kargil War) में इंडियन एयर फोर्स के असली ऑपरेशन पर आधारित सीरीज ऑपरेशन सफेद सागर (Operation Safed Sagar) इस वक्त ओटीटी की सबसे पसंद की जाने वाली वॉर ड्रामा (War Drama) में से एक बन गई है।
सिद्धार्थ, जिम्मी शेरगिल, अभय वर्मा, दीया मिर्जा और आदिल हुसैन जैसे सितारों से सजी वेब सीरीज ऑपरेशन सफेद सागर जब से ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज हुई है, तभी से काफी पसंद की जा रही है। सच्ची कहानी और घटना को जिस तरह स्क्रीन पर दिखाया गया है, वो काबिल-ए-तारीफ है।
मगर क्या आपको पता है कि सच्ची कहानी से इंस्पायर्ड 6 एपिसोडिक वॉर ड्रामा को बनाने में मेकर्स और स्टार कास्ट ने पांच साल तक मेहनत की है। सीरीज के प्रोड्यूसर्स अभिजीत सिंह परमार और महबूब पाल सिंह बरार ने हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में सीरीज को बनाने के पीछे की कहानी शेयर की है।
पहले फिल्म बनने वाली थी ऑपरेशन सफेद सागर
ऑपरेशन सफेद सागर पहले एक फिल्म बनने वाली थी। को-क्रिएटर और IAF के रिटायर्ड अफसर कुशल श्रीवास्तव 'गोल्डन एरोज' पर एक फिल्म बनाने की सोच रहे थे। 'गोल्डन एरोज' इंडियन एयर फोर्स का वह स्क्वाड्रन है जिसने युद्ध के दौरान खतरनाक बॉम्बिंग मिशन को अंजाम दिया था। जब वह को-क्रिएटर अभिजीत से 2021 में मिले तो उन्होंने शो बनाने पर जोर दिया।

इसके बाद कुशाल की मुलाकात इंडियन एयर फोर्स के बड़े अफसरों से हुई और उन्होंने भी उनसे शो बनाने का ही सुझाव दिया। इसके बाद उन्होंने जनवरी 2022 में शो की स्क्रिप्ट लिखना शुरू कर दिया था और दो साल में पूरी स्क्रिप्ट तैयार हुई।
100 घंटे पायलट का लिया गया था इंटरव्यू
कुशल और उनकी को-राइटर अंतरा ने सिर्फ पायलटों के इंटरव्यू में ही 100 घंटे बिताए थे। ये वे फाइटर पायलट थे जिन्होंने कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था। अभिजीत ने इस बारे में बताया, "ये वे लोग थे जिन्होंने युद्ध में भाग लिया था, जो वहां मौजूद थे जो युद्ध से पहले आए थे, युद्ध से पहले चले गए थे या युद्ध के बाद आए थे। यह बहुत डीप रिसर्च थी।"

शो के को-प्रोड्यूसर ने बताया कि वह युद्ध के साथ-साथ लड़ाई लड़ने वालों की निजी जिंदगी को भी दिखाना चाहते थे। उन्होंने कहा, "मैंने इसे कभी भी युद्ध की कहानी या युद्ध की घटना की कहानी यानी हमारे युद्ध जीतने की कहानी के तौर पर नहीं देखा। मेरे लिए यह हमेशा युद्ध के पीछे के इंसानों और उनके साथ क्या होता है, और जो लोग ऐसी लड़ाई में शामिल हो जाते हैं या खींच लिए जाते हैं, उनके साथ क्या होता है, इस बारे में थी।"
असली लोकेशन पर शूट हुई सीरीज
महबूब ने बताया कि ऑपरेशन सफेद सागर की शूटिंग असली लोकेशन पर हुई है। शूटिंग 16,700 फीट की ऊंचाई पर भी हुई थी। महबूब कहते हैं, "हम सभी उन सभी असल जगहों पर गए, असल किरदारों से मिले, सभी बेस पर गए, यहां तक कि उन बेस पर भी जहां हमने शूटिंग नहीं की, लेकिन जो असल कहानी का हिस्सा थे और जब हमने ये सब देखा तो हमें अंदाजा होने लगा कि हम शो में किन जगहों को लोकेशन के तौर पर दिखाना चाहते हैं।"

ऑपरेशन सफेद सागर की शूटिंग कुछ लोकेशंस पर बहुत जानलेवा थी जहां अस्पताल हमेशा अलर्ट पर रहता था। प्रोड्यूसर ने बताया कि सीरीज के कुछ सीन्स ऐसी जगहों पर शूट किए गए हैं, जहां घूमने वाले लोग भी नहीं पहुंच पाते थे। शूटिंग के दौरान टीम की सांस फूलने लगती थी। एंबुलेंस हमेशा तैयार खड़ी रहती थी और अस्पताल को भी अलर्ट पर रखा गया था। 18 महीने में करीब 11 लोकेशंस पर शूटिंग पूरी की गई थी।