July 27, 2026

भोपाल में 'स्मार्ट' साइकिल बनी कबाड़! गोदाम में जंग खा रहीं सैकड़ों साइकिलें; 10 करोड़ हुए थे खर्च

भोपाल में 'स्मार्ट' साइकिल बनी कबाड़! गोदाम में जंग खा रहीं सैकड़ों साइकिलें; 10 करोड़ हुए थे खर्च

करोड़ों की साइकिलें गोदाम में पड़ीं.

Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को स्मार्ट और प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई स्मार्ट साइकिल परियोजना अब बदहाली की तस्वीर बन चुकी है. जिस योजना पर करीब ₹10 करोड़ खर्च किए गए थे, उसकी सैकड़ों स्मार्ट साइकिलें आज नगर निगम के गोदाम में धूल और जंग खा रही हैं. वहीं करोड़ों रुपए की लागत से बनाया गया साइकिल ट्रैक भी टूट-फूट और अतिक्रमण का शिकार हो चुका है. इस स्थिति ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के रखरखाव और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

गोदाम में कबाड़ बनी स्मार्ट साइकिलें

भोपाल के ISBT स्थित नगर निगम के गोदाम में बड़ी संख्या में स्मार्ट साइकिलें और ई-बाइक बेकार पड़ी हैं. कभी शहर में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए खरीदी गई ये साइकिलें अब इस्तेमाल के बजाय कबाड़ बन चुकी हैं. कई साइकिलों के टायर गायब हैं, कई के पुर्जे टूट चुके हैं और कई पूरी तरह जंग खा चुकी हैं. करोड़ों रुपए खर्च कर खरीदी गई ये साइकिलें अब लोगों की सुविधा के बजाय सरकारी लापरवाही की मिसाल बन गई हैं.

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बदहाल हुआ साइकिल ट्रैक

स्मार्ट साइकिल परियोजना के साथ बनाया गया करीब 12 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक भी अपनी पहचान खो चुका है. वर्ष 2017-18 में बड़े दावों के साथ तैयार किया गया यह ट्रैक अब जगह-जगह से टूटा हुआ है. जहां कभी लोगों को सुरक्षित साइकिल चलाने की सुविधा मिलनी थी, वहां अब गड्ढे नजर आते हैं. कई जगह ट्रैक पर गाय बैठी रहती हैं तो कहीं सब्जी के ठेले और अन्य अतिक्रमण दिखाई देते हैं. सड़क पर बनी साइकिल की फीकी पड़ चुकी पेंटिंग ही इस बात का संकेत देती है कि यहां कभी साइकिल ट्रैक हुआ करता था.

परियोजना पर कितना हुआ खर्च?

  • 1- भोपाल की स्मार्ट साइकिल परियोजना पर कुल मिलाकर करीब ₹9.5 से ₹10 करोड़ खर्च किए गए.
  • 2- 12 किलोमीटर साइकिल ट्रैक के निर्माण पर करीब ₹4.5 करोड़ खर्च हुए.
  • 3- 500 जीपीएस युक्त स्मार्ट साइकिलें, 50 डॉकिंग स्टेशन, मोबाइल ऐप और पूरे शेयरिंग सिस्टम पर करीब ₹5 करोड़ खर्च किए गए.
  • 4- 2023 में ट्रैक के रखरखाव और सफाई के लिए नगर निगम ने ₹35 लाख का अलग टेंडर भी जारी किया.
  • 5- इसके बावजूद आज न तो साइकिलें उपयोग में हैं और न ही ट्रैक अपनी मूल स्थिति में बचा है.

महापौर ने स्मार्ट सिटी परियोजना को बताया जिम्मेदार

भोपाल की महापौर मालती राय ने इस मामले में कहा कि यह परियोजना स्मार्ट सिटी के तहत शुरू की गई थी. उन्होंने बताया कि इसे दोबारा शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही परियोजना को फिर से चालू करने की कोशिश की जाएगी.

कांग्रेस ने लगाए बड़े आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस पूरे मामले को स्मार्ट सिटी परियोजना की बड़ी विफलता बताते हुए इसे करोड़ों रुपए की बर्बादी करार दिया. उन्होंने कहा कि न तो साइकिलें बचीं और न ही ट्रैक, जबकि जनता का पैसा इस परियोजना पर खर्च किया गया. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

जवाबदेही पर उठ रहे सवाल

स्मार्ट साइकिल परियोजना की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े करती है. यदि इस योजना को लंबे समय तक संचालित नहीं किया जा सका तो करोड़ों रुपए खर्च करने का उद्देश्य क्या था? परियोजना के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी और इसकी विफलता के लिए कौन जवाबदेह है?

शुभम गुप्ता

शुभम गुप्ता

शुभम गुप्ता को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक से अधिक का अनुभव है. शुभम ने आरजीपीवी यूनिवर्सिटी से IT में इंजीनियरिंग की. इसके बाद ITMI से ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म सर्टिफिकेशन प्राप्त किया. उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली में “आज तक” से बतौर संवाददाता की, जहां आदर्श ग्राम योजना, नोटबंदी और मुद्रा योजना जैसी कई अहम रिपोर्ट्स ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. दिल्ली में लगभग पांच साल काम करने के बाद शुभम ने अपने गृहप्रदेश मध्यप्रदेश का रुख किया और न्यूज़ नेशन से जुड़े. यहां उनकी कई खबरों ने व्यापक असर डाला, जैसे कृषि विस्तार अधिकारी परीक्षा घोटाले को उजागर करने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी. साल 2020 में मध्यप्रदेश की राजनीति के ऐतिहासिक घटनाक्रम, कमलनाथ सरकार के पतन, को उन्होंने बेहद बारीकी से कवर किया. कोरोना काल में उन्होंने जान जोखिम में डालकर व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया, जिसके बाद सरकार को कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़े. साल 2023 में शुभम गुप्ता नई भूमिका में TV9 भारतवर्ष के एमपी-सीजी ब्यूरो प्रमुख बने. यहां भी उन्होंने कई बड़े घोटाले उजागर किए, जैसे- बर्तन घोटाला, सर्पदंश घोटाला, धान घोटाला और डामर घोटाला. उनकी रिपोर्टिंग के बाद मुफ्त शव वाहन योजना को तत्काल प्रभाव से शुरू करना पड़ा. मुख्यमंत्री ने महज़ 9 घंटे में इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

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