UP 69000 Teachers Bharti Case: उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती मामले की एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें चयनित अभ्यर्तियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें रखीं. साथ ही हाईकोर्ट के के फैसले का भी जिक्र किया.
UP 69000 Teachers Bharti Case: उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती मामले की एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें चयनित अभ्यर्तियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें रखीं. साथ ही हाईकोर्ट के के फैसले का भी जिक्र किया.
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SC में 22 सिंतबर को 96000 शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई Photograph: (ANI)
UP 69000 Teachers Bharti Case: यूपी में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद अभी भी खत्म नहीं हुआ है. इस मामले में गुरुवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत के सामने चयनित अभ्यर्थियों और आरक्षण से प्रभावित उम्मीदवारों की ओर से अलग-अलग दलीलें रखी गईं. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आखिरी निर्णय वही होगा जो कानून और तथ्यों के आधार पर उचित होगा.
चयनित शिक्षकों की ओर से क्या दी गई दलील?
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान चयनित अभ्यर्थियों की ओर से पेश हुए वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर उस आदेश को बरकरार रखा जाता है, तो ऐसे करीब 10 हजार शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जो पिछले करीब छह साल से नौकरी कर रहे हैं. इसके साथ ही चयनित अभ्यर्थियों के वकील ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया गया.
उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को टीईटी में पहले ही आरक्षण का लाभ मिल चुका था और बाद में सहायक शिक्षक भर्ती में भी आरक्षण का लाभ लिया गया. उन्होंने कहा कि इसी आधार पर इसे दोहरे लाभ के रूप में पेश किया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क पर सवाल करते हुए कहा कि टीईटी भर्ती परीक्षा नहीं बल्कि पात्रता परीक्षा है. ऐसे में टीईटी में मिले लाभ को भर्ती प्रक्रिया में दो बार आरक्षण लेने के तौर पर कैसे देखा जा सकता है.
817 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का दिया तर्क
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो सिर्फ 817 अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को ही नियुक्ति का अवसर मिल सकता है. जबकि आरक्षित वर्ग से जुड़े अभ्यर्थियों की संख्या इससे कहीं अधिक है.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन उम्मीदवारों का चयन का अधिकार बनता है, उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए. इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय लागू नियमों और उम्मीदवारों के अधिकारों को ध्यान में रखकर किया जाएगा.
आरक्षण का लाभ लेने के बाद सामान्य वर्ग में जाने पर सवाल
वहीं चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों के सामान्य वर्ग की मेरिट में शामिल होने के मुद्दे पर भी अपनी दलील रखी. उन्होंने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण या उससे जुड़ी किसी छूट का लाभ लिया है, तो अधिक अंक आने की स्थिति में उसे सामान्य श्रेणी में स्थानांतरित होने का दावा नहीं करना चाहिए. इस संबंध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के कुछ फैसलों का भी हवाला दिया.
22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी. जिसमें उन अभ्यर्थियों की ओर से दलीलें सुनी जाएंगी, जो आरक्षण व्यवस्था के कारण प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं.
जानें क्या है 69 हजार शिक्षक भर्ती का पूरा मामला?
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 5 दिसंबर 2018 को 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. इस भर्ती के लिए चार लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. जिसके लिए लिखित परीक्षा 6 जनवरी 2019 को आयोजित कराई गई, इस परीक्षा का परिणाम 12 मई 2020 को जारी किया गया. परीक्षा परिणाम में करीब 1.47 लाख अभ्यर्थी सफल हुए. उस समय सामान्य वर्ग की कटऑफ 67.11 प्रतिशत और ओबीसी वर्ग की 66.73 प्रतिशत बताई गई थी.
भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर हुआ विवाद
परीक्षा परिणाम आने के बाद भर्ती में आरक्षण लागू करने के तरीके को लेकर विवाद शुरू हो गया. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि ओबीसी और एससी वर्ग के लिए निर्धारित हजारों पदों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई है. उनका दावा था कि इससे आरक्षित वर्ग के ऐसे उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं जो चयन की योग्यता रखते थे.