भारत के लिए बड़ी चेतावनी (Big Warning For India) आई है और ये वेस्ट एशिया से कनेक्टेड है. इस बड़े संकट को लेकर एसबीआई रिसर्च की ओर से अलर्ट किया गया है. SBI की नई रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि कच्चा तेल फिर से भारत का खेल बिगाड़ सकता है और महज आने वाले 10 दिन में इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में (Crude Oil Price) 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकती है. एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ये भारत के लिए परेशानी का सबब होगा, क्योंकि इससे देश की आयतित वस्तुओं की कीमत 130 डॉलर तक जा सकती है.
कच्चा तेल... बिगाड़ेगा खेल
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम और ग्लोबल सप्लाई की बहाली के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों के लिए तीन संभावित चरणों का फ्रेमवर्क पेश किया गया है. SBI Research के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में निकट भविष्य में तेज गिरावट आने की संभावना बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम (Brent Crude Price) अगले 10 कारोबारी दिनों में संभावित रूप से 110 डॉलर प्रति बैरल तक उछल सकता है. अगर ऐसा होता है कि फिर भारत की कच्चे तेल की बास्केट 130 डॉलर तक पहुंच सकती है.
रुपया को स्थिर करने में परेशानी
सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि कि भू-राजनीतिक टेंशन और आपूर्ति-पक्ष के बढ़ते जोखिमों के कारण, ब्रेंट की कीमत पूर्वानुमान से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल होती है, तो भारतीय बास्केट की कीमत 10 व्यापारिक दिनों की पूर्वानुमान अवधि में लगभग 127 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल होगी.
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एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ये बड़े जोखिम लगातार तेल की कीमतों पर लगातार दबाव डालने का काम रहे हैं, जिससे भारतीय रुपया को स्थिर करने के प्रयासों में जटिलता पेश आ रही है. उन्होंने कहा है कि, 'डेटेड ब्रेंट और इंडियन बास्केट दोनों के लिए रिकरेंट न्यूरल नेटवर्क का पूर्वानुमान बढ़ती प्रवृत्ति दर्शाता है, जिससे संकेत मिलता है कि तेल की कीमतों में तेज गिरावट की संभावना नहीं है और है भी तो सिर्फ लंबी अवधि में ही संभव है.'
तेल की कीमतों का Rupee कनेक्शन
कच्चे तेल की कीमतों का यह दृष्टिकोण ऐसे समय में आया है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने इंडियन करेंसी रुपया को संभालने के लिए तमाम उपाय लागू किए हैं. इनका असर भी दिखा है और Indian Rupee अमेरिकी डॉलर की तुलना में 1% तक ऊपर नजर आया है.
उपायों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के लिए एक विशेष डॉलर-आपूर्ति विंडो शामिल है, जिसे खुले विदेशी मुद्रा बाजार से लगभग 10-12 अरब डॉलर की मंथली Dollar डिमांड को स्थानांतरित करने के लिए डिजाइन किया गया है. करेंसी चेंज से जुड़े पिछले हस्तक्षेपों के विपरीत, नई व्यवस्था में भारत के फॉरेक्स रिजर्व से सीधे डॉलर की बिक्री शामिल है.
हालांकि, रिसर्च रिपोर्ट ने तरलता की कठिन परिस्थितियों पर भी फोकस किया है और इसमें बैंकों के न्यूनतम डेली कैश रिजर्व रेशियो को बनाए रखने की आवश्यकता को 90% से बढ़ाकर 99% किया गया है, जबकि सरकारी प्रतिभूतियों की 25,000 करोड़ रुपये की नियोजित बिक्री को शामिल है. अनुमान लगाया गया है कि RBI आरबीआई के इन उपायों से समय के साथ बैंकिंग सिस्टम से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाली जा सकती है. ऐसे में सिर्फ आरबीआई का हस्तक्षेप रुपये को सीमित समर्थन ही दे सकता है.
दबाव बहुत, लेकिन भारत में है दम
एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि 3 नवंबर से पहले ब्रेंट क्रूड प्राइस काफी हद तक सीमित दायरे में रहेगा, जिनमें मामूली गिरावट की संभावना है. यानी राजनयिक प्रयासों और इमरजेंसी ऑयल रिजर्व जारी करने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इसमें समय लगेगा.
एक्सपर्ट्स ने इन तमाम दबावों के बावजूद कहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आकस्मिकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, हालांकि FY2027 में भुगतान संतुलन अधिशेष घटकर 55-60 अरब डॉलर हो जाएगा. उन्होंने कहा कि, 'संक्षेप में कहें तो, भारत का फॉरेक्स रिजर्व सबसे कठिन परिस्थितियों में भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त से अधिक है.
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