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ग्राउंड रिपोर्ट
लग्जरी फार्महाउस में रहने वाला करोड़पति किसान:10वीं फेल होकर 250 एकड़ में खेती कर रहे; बाराबंकी में सिर्फ केले से ₹1.65 करोड़ कमाएलखनऊ1 घंटे पहले
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10वीं में फेल होने पर जिस शख्स ने पढ़ाई छोड़ी। पारंपरिक खेती से सिर्फ 15-20 हजार रुपए बचा पाता था। आज वही किसान करोड़ों का टर्नओवर कर रहा है। बात हो रही है बाराबंकी के 'केला किंग' और पद्मश्री से सम्मानित रामशरण वर्मा की।
यूपी में ‘टिशू कल्चर’ केले को बढ़ावा देने वाले रामशरण ने इस साल 55 एकड़ में केले की खेती की है। दावा है कि एक एकड़ से 3 से 4 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी अनोखी तकनीक ऐसी है कि दूसरे राज्य ही नहीं, विदेशों से भी लोग खेती के गुर सीखने उनके लग्जरी फार्म हाउस पहुंचते हैं। दैनिक भास्कर की टीम उनके खेत पर पहुंची। रामशरण ने बताया कि कैसे एक प्रयोग ने उन्हें 'करोड़पति किसान' बना दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

दौलतपुर गांव के बीचो-बीच रामशरण का फार्महाउस और खेत हैं।
किसानों ने कहा- हमने रामशरण के तरीके आजमाए
बाराबंकी जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर दौलतपुर गांव है। यहीं पर रामशरण वर्मा का फार्म हाउस है। गांव में केला, टमाटर, लौकी जैसी फसलें ज्यादा नजर आईं, गेहूं या धान की कम। रास्ते में अलग-अलग जगह खेतों के करीब मजदूर ट्रक में केला लोड करते दिखे।
किसानों ने बताया कि गांव में करीब ढाई हजार लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं। 20 साल पहले तक सब लोग परंपरागत खेती करते थे। मतलब, गेहूं-धान की फसल ज्यादा उगाते थे। फिर धीरे-धीरे किसान रामशरण के तौर-तरीके अपनाने लगे। अब गांव के ज्यादातर किसान केला, टमाटर, तरबूज की खेती करते हैं। अच्छी फसल का नतीजा ये हुआ कि किसानों के हाथ में पैसा आया और उनकी जीवनशैली भी बदली।
6 एकड़ से शुरुआत की, आज 250 एकड़ में खेती कर रहे
रामशरण के पास करीब 10 एकड़ जमीन है। हमने रामशरण से पूछा- कितने एकड़ में खेती करते हैं और मुनाफा कितना कमाते हैं? वे बताते हैं- हमारे पास शुरुआत में 6 एकड़ जमीन थी। बाद में 3-4 एकड़ जमीन और खरीद ली। इसके बाद हमने गांव के किसानों से सहकारिता के आधार पर जमीन ली और खेती शुरू की।
इस वक्त 250 एकड़ में खेती कर रहे हैं। इस साल 55 से 57 एकड़ में केला लगाया था। अगर मुनाफे की बात करें, तो इस साल प्रति एकड़ 3 से 4 लाख रुपए का फायदा हुआ है। अगर न्यूनतम 3 लाख रुपए प्रति एकड़ के मुनाफे को 55 एकड़ के हिसाब से देखें, तो यह रकम 1 करोड़ 65 लाख रुपए होती है।
रामशरण आगे कहते हैं- हर साल 3-4 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। कभी 5-6 तो कभी 7 करोड़ तक वापस आते हैं। मतलब कह सकते हैं कि हम करोड़पति किसान हैं। किसानी से ही तो इतना आलीशान फार्म हाउस बनाया है। हमने किसानी करने के तौर तरीकों के बारे में पूछा। तो वह मुस्कुराकर कहते हैं- खेती की बात खेत पर…।

रामशरण बताते हैं कि विश्व बाजार में 20 से 28 सेमी. साइज का केला अच्छा माना जाता है। हमारे यहां के केले के लंबाई 22-23 सेमी. तक होती है।
उनके साथ बात करते हुए केले के खेत में पहुंचे। हमने पूछा- क्या शुरू से किसान रहे हैं, पढ़ाई की होगी? वह कहते हैं- 10वीं में फेल हुआ, तो पढ़ाई छोड़ दी। 1988 से खेती कर रहा हूं। तब परिवार के पास 6 एकड़ जमीन थी। गेहूं-धान ही लगाया जाता था। भरपूर मेहनत के बाद भी 15-20 हजार रुपए ही बचते थे।
फिर मुझे गुजरात और महाराष्ट्र के किसानों के बारे में जानकारी मिली। मैं वहां गया, किसानों के साथ रहा। उनकी खेती-किसानी का तरीका समझा। लौटकर मैंने यूपी में 'टिशू कल्चर' तकनीक से खेती की शुरुआत की। करीब 32 साल हो गए इस तकनीक से खेती करते हुए।
टिशू कल्चर से केला कम समय में अच्छा तैयार होता है…
हमने टिशू कल्चर के बारे मे पूछा। रामशरण बताते हैं- केले की अन्य फसल तैयार होने में 15 महीने लेती हैं, लेकिन ये 11-12 महीने में ही तैयार हो जाता है। अब चूंकि यूपी में सर्दी पड़ती है, तो यहां 12-13 महीने मान लीजिए। बाकी गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में तो 11-12 महीने में ही फसल मिल जाती है।
इसके फायदे के बारे में रामशरण कहते हैं- हर चीज में समय का महत्व होता है। इस फसल को हम 15 जून से 15 जुलाई के बीच लगा देते हैं। अगले साल अगस्त-सितंबर तक तैयार हो जाती है। इसी दौरान त्योहार रहते हैं। केले की खपत ज्यादा होती है, इसलिए भाव भी अच्छा मिल जाता है। गर्मी के चलते हमारे केलों की साइज 22 से 23 सेंटीमीटर तक होती है इसलिए 15-16 रुपए किलो आराम से मिल जाते हैं।

रामशरण कहते हैं कि खेती में नई तकनीक के जरिए लगातार प्रयोग करना अच्छा लगता है। इसका फायदा भी मिलता है।
50 हजार किसान हमारे तरीकों से खेती कर रहे
रामशरण बताते हैं- हर साल 14 से 15 हजार किसान मेरे पास आते हैं। फसल देखते हैं, बहुत सारी चीजें पूछते हैं और फिर अपने खेतों में उसी तरह का प्रयोग करते हैं। इस वक्त 50 हजार किसान हमारी टेक्निक के जरिए ढाई लाख हेक्टेयर में खेती कर रहे हैं। पिछले दिनों अंबेडकरनगर के एक किसान आए थे। उन्होंने कहा कि हमने आपसे सीखकर केला लगाया और तीन एकड़ फसल से 24 लाख रुपए का केला बेचा है। जो लोग शहर नहीं जाते, उन्हें हमने गांव में ही रोजगार दे रखा है। यह अच्छी बात है।
रामशरण किसानों को एक हिदायत देते हैं कि अगर आपके पास 3-4 एकड़ खेत है, तो कभी भी एक ही फसल न लगाएं। हमारे देश में फसलों में 50% भूमिका मौसम की होती है। कई बार तूफान, ओला, बारिश के चलते पूरी फसल खराब हो जाती है। अगर आप केला के साथ आलू, टमाटर लगाते हैं, तो हो सकता है कि एक पर मौसम का असर पड़े, लेकिन दूसरी बच जाए। पिछले साल महाराष्ट्र में तूफान आया। केले की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान हो गया था।
पद्मश्री से लेकर तमाम बड़े पुरस्कार हासिल कर चुके
रामशरण वर्मा को कृषि के क्षेत्र में बहुत सारे अवॉर्ड मिल चुके हैं। 2019 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था। उससे पहले वह भारत सरकार से जगजीवन राम किसान पुरस्कार, कृषि नेतृत्व पुरस्कार, यूपी सरकार से चौधरी चरण सिंह किसान सम्मान, उद्यान पंडित पुरस्कार, नव-अन्वेषक सम्मान पुरस्कार हासिल कर चुके हैं।
इसके अलावा रामशरण को उत्तराखंड, हरियाणा में भी आदर्श किसान के प्रतीक पुरस्कार मिले हैं। ये सारे पुरस्कार रामशरण वर्मा ने अपने फार्म हाउस में सजाकर रखे हैं। रामशरण खुद को गैर राजनीतिक व्यक्ति मानते हैं। वह कहते हैं- हमसे नेता लोग भी मिलते हैं, तो सिर्फ खेती-किसानी की ही बात करते हैं। हमें यही अच्छा लगता है।

गांव के बीचो-बीच जहां तक नजर जाती है, सिर्फ केले के खेत ही दिखाई पड़ते हैं। पीछे रामशरण का आलीशान फॉर्महाउस भी नजर आ रहा।
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