July 28, 2026

10 साल में 217 प्रतिशत बढ़ी इंटरनेट कनेक्टिविटी, अब कितने सब्सक्राइबर्स?

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  • दिल्ली में इंटरनेट ग्राहक 10 साल में 217% बढ़कर 5.7 करोड़।
  • सस्ते फोन, डेटा, 4G/5G ने ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ाई।
  • भारत में सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता लगभग एक अरब तक पहुँचने वाले हैं।
  • ग्रामीण 57% उपयोगकर्ता, 44% भारतीय AI फीचर्स का उपयोग करते हैं।

Internet Subscription In Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले एक दशक में इंटरनेट कनेक्टिविटी तेजी से फैली है. दिल्ली सरकार के ताजा डेटा से पता चलता है कि 2015 में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 1.8 करोड़ थी, जो 2025 में बढ़कर 5.7 करोड़ हो गई है. यानी 10 सालों में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 217 प्रतिशत बढ़ी है. ये आंकड़े भले ही दिल्ली की तस्वीर पेश कर रहे हैं, लेकिन पूरा देश ही ऐसी क्रांति का गवाह बना है. इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ-साथ डेटा की कम कीमत के कारण देश के टेलीकॉम सेक्टर में करोड़ों नए ग्राहक जुड़े हैं और आज भारत दुनिया में मोबाइल यूजर्स की संख्या चीन के बाद सबसे ज्यादा है.

इंटरनेट सब्सक्राइब का क्या मतलब?

दिल्ली सरकार की ताजा रिपोर्ट में इंटरनेट यूजर की बजाय इंटरनेट सब्सक्रिप्शन का जिक्र किया गया है. इसमें मोबाइल वायरलेस, फिक्स्ड वायरलेस और वायर्ड कनेक्शन शामिल होते हैं. यानी अगर एक व्यक्ति मोबाइल इंटरनेट के साथ-साथ ब्रॉडबैंड कनेक्शन भी यूज करता है तो उसके पास एक से ज्यादा सब्सक्रिप्शन गिने जाएंगे. यही कारण है कि दिल्ली की कुल जनसंख्या 2.3 करोड़ होने के बाद भी यहां 5.7 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर्स हैं. दिल्ली में कुल जनसंख्या की तुलना में 2.5 गुना ज्यादा इंटरनेट सब्सक्राइबर्स हैं.
10 साल में 217 प्रतिशत बढ़ी इंटरनेट कनेक्टिविटी, अब कितने सब्सक्राइबर्स?

इस रफ्तार से बढ़ते गए सब्सक्राइबर

अगर इंटरनेट सब्सक्राइबर बढ़ने की रफ्तार पर नजर डालें तो 2015 में जहां 1.8 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे, वहीं 2016 में यह संख्या बढ़कर 2 करोड़, 2017 में 2.7 करोड़, 2018 में 3.1 करोड़ और 2019 में 3.6 करोड़ हो गई. 2020 में यह आंकड़ा पहली बार 4 करोड़ के पास पहुंचा और इस साल कुल संख्या 4.1 करोड़ हो गई. 2021 में यह आंकड़ा 4.5 करोड़, 2022 में 4.6 करोड़, 2023 में 5.3 करोड़, 2024 में 5.6 करोड़ और 2025 में 5.7 करोड़ हो गया. इस हिसाब से देखा जाए तो सबसे तेज बढ़ोतरी 2022-2023 हुई. सब्सक्रिप्शन में बढ़ोतरी को 2016 की नोटबंदी और 2020 में आई कोरोना महामारी से भी जोड़ा जा सकता है. इन दोनों ही सालों में सब्सक्रिप्शन तेजी से बढ़ा है. डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन एजुकेशन, रिमोट वर्किंग और ऐप-बेस्ड सर्विसेस के आने के कारण लोग अब पहले से कहीं ज्यादा इंटरनेट यूज करने लगे हैं.
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सब्सक्रिप्शन बढ़ने के और क्या कारण?

अगर सब्सक्रिप्शन बढ़ने के बाकी कारणों पर नजर डालें तो किफायती स्मार्टफोन की उपलब्धता, सस्ता मोबाइल डेटा, 4G और 5G नेटवर्क के आने समेत कई वजहों से लोग इंटरनेट कनेक्शन लेने लगे हैं. देश की कुल जनसंख्या में 2 प्रतिशत से भी कम हिस्सा होने के बावजूद 2025 में पूरे देश के कुल इंटरनेट सब्सक्रिप्शन में से 6 प्रतिशत अकेले दिल्ली में दर्ज हुए थे. यह दिखाता है कि दिल्ली में इंटरनेट किस कदर जरूरी साबित हो रहा है. हालांकि, अगर पिछले एक दशक को देखें तो दिल्ली में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन की रफ्तार राष्ट्रीय औसत के मुकाबले कम रही है. पूरे देश की बात करें तो 2015 में 30.2 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे, जो 2025 में 96.9 करोड़ हो गए. यानी इस संख्या में 220 प्रतिशत का उछाल देखा गया है, जबकि दिल्ली में यह रफ्तार 217 प्रतिशत रही.

देश में तेजी से बढ़ रही इंटरनेट यूजर्स की संख्या

इस साल की शुरुआत में आई एक और रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में एक्टिव इंटरनेट यूजर्स की संख्या एक अरब के पास पहुंचने वाली है. 2025 में सालाना आधार पर इसमें लगभग 8 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है. लगभग 96 करोड़ यूजर्स के साथ भारत दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ने वाली डिजिटल मार्केट बनने की तरफ बढ़ रहा है. कुल इंटरनेट यूजर्स में करीब 57 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में रहते हैं.

एआई को भी तेजी से अपना रहे इंटरनेट यूजर्स

देश में एआई का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है. एक सर्वे में सामने आया था कि देश के लगभग 44 प्रतिशत इंटरनेट यूजर्स वॉइस सर्च, चैटबॉट्स और एआई फिल्टर जैसे एआई फीचर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. 15 से 24 साल के यूजर्स के बीच इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है. एआई यूज करने वालों में 57 प्रतिशत हिस्सा 15-24 साल और 52 प्रतिशत हिस्सा 25-44 साल के यूजर्स का है.

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