August 19, 2026

मेरी क्या गलती 10: नौकरी जाने से ललन का परिवार तनाव में, पत्नी हैं गर्भवती, लोन की किस्त भी बड़ी

Ranchi News: झारखंड में जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के बाद नौकरी कर रहे चयनित अभ्यर्थियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है. देवघर के रहने वाले ललन कुमार पांडे भी ऐसे ही अभ्यर्थियों में शामिल हैं, जिन्होंने करीब 10 साल की तैयारी, लंबी कानूनी लड़ाई और जांच के बाद नौकरी हासिल की थी. नियुक्ति के बाद उन्होंने सात महीने तक जमशेदपुर के जल संसाधन विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के रूप में काम किया, लेकिन अब नौकरी रद्द होने से उनका पूरा परिवार आर्थिक संकट में आ गया है.

इसे भी पढ़ें - 

मेरी क्या गलती 9 :  कई असफलताओं के बाद सरकारी नौकरी मिली, सूरज बोले-राजनीतिक भेंट नहीं चढ़ने देंगे
Patna News: पुलिस कार्रवाई के विरोध में तेजस्वी यादव का लोकभवन मार्च, हिरासत में लिए गए


ललन कुमार पांडे के मुताबिक, सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए उन्होंने करीब 10 वर्षों तक तैयारी की. नियुक्ति के मामले में करीब एक साल तक सीआईडी जांच चली और इसके बाद उन्हें उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. अदालती प्रक्रिया के बाद उनकी नियुक्ति हुई और उन्होंने जमशेदपुर स्थित जल संसाधन विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर सात महीने तक सेवा दी.

ललन का कहना है कि 17 तारीख की रात अचानक उन्हें नियुक्तियां रद्द किए जाने की जानकारी मिली. उनका आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मंत्रियों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया.

ललन अपने सात सदस्यों वाले परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य हैं. उनके परिवार में पत्नी और बच्चा हैं, जबकि उनकी पत्नी दोबारा मां बनने वाली हैं. उन्होंने बैंक से लोन भी ले रखा है, जिसकी करीब 25 हजार रुपये की मासिक ईएमआई जाती है. नौकरी चले जाने के बाद अब उन्हें परिवार के खर्च और लोन की किस्त, दोनों की चिंता सता रही है.

ललन के मुताबिक, नौकरी रद्द होने की खबर के बाद उनके परिवार में बेहद तनाव का माहौल है. उनका कहना है कि परिवार के लोग इस स्थिति से इतने परेशान हैं कि ठीक से खाना भी नहीं खा पा रहे हैं.

ललन का कहना है कि वह किसी भी तरह की जांच के विरोध में नहीं हैं. अगर नियुक्ति प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. उनका सवाल है कि यदि कुछ लोगों ने गलत तरीके से नियुक्ति हासिल की है, तो उसके लिए सभी चयनित अभ्यर्थियों को सजा क्यों दी जा रही है?

उन्होंने सरकार से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करने और निर्दोष अभ्यर्थियों को सेवा में बने रहने का अवसर देने की मांग की है. ललन का कहना है कि वर्षों की मेहनत और कानूनी लड़ाई के बाद मिली नौकरी छिन जाने से उनके सामने परिवार चलाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.