August 6, 2026

10 साल जेल में कटेंगे तरुण तेजपाल के दिन, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, पढ़ें कोर्ट का पूरा जजमेंट| Navbharat Live

Updated On: Aug 06, 2026 | 03:31 PM IST

विज्ञापन

सार

Tarun Tejpal Case Judgment: यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका। कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटकर सुनाई 10 साल की सजा, पढ़ें पूरा जजमेंट।

tarun tejpal sentenced 10 years jail bombay high court verdict

तरुण तेजपाल की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Tarun Tejpal Sentenced 10 Years Jail: पत्रकारिता की दुनिया में कभी बड़ा नाम रहे तहलका पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल के लिए कानून का घेरा अब पूरी तरह कस चुका है। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 2013 के उस चर्चित मामले में आया है, जिसमें एक जूनियर सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न और बलात्कार के गंभीर आरोप लगाए थे।

जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 10 साल की सजा इन अपराधों के लिए निर्धारित न्यूनतम सजा है।

इन धाराओं के तहत दंडित किया गया है

  • धारा 376(2)(f) और 376(2)(k): विश्वास के रिश्ते और प्रभुत्व की स्थिति का दुरुपयोग कर बलात्कार करने के लिए 10 साल के सश्रम कारावास और 5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
  • धारा 354A: यौन उत्पीड़न के लिए एक साल की सजा।
  • धारा 354B: महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला करने के लिए तीन साल की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना।
  • अन्य धाराएं: धारा 341 और 342 के तहत भी जुर्माना लगाया गया है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिसका अर्थ है कि तेजपाल को कुल 10 साल जेल में बिताने होंगे।

बरी होने से सजा तक का सफर

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल पर अपनी ही सहकर्मी के साथ लिफ्ट में यौन शोषण करने का आरोप लगा था। मई 2021 में मापुसा की एक सेशन कोर्ट ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, यह कहते हुए कि आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

हालांकि, गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि साक्ष्य तेजपाल की संलिप्तता को स्पष्ट करते हैं।

सम्बंधित ख़बरें

यह भी पढ़ें: ‘उद्धव ठाकरे आपसे अच्छे, आपने धोखा दिया’, कुनबी प्रमाण पत्र रद्द होने पर एकनाथ शिंदे पर भड़के मनोज जरांगे

वह माफीनामा जो बना गले की फांस

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 19 नवंबर 2013 को तेजपाल द्वारा भेजा गया एक ईमेल था। उन्होंने तहलका की तत्कालीन प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को भेजे गए ईमेल में पीड़िता से बिना शर्त माफी मांगी थी। उन्होंने स्वीकार किया था कि यह निर्णय की शर्मनाक चूक थी, जिसने उन्हें पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाने की कोशिश करने के लिए प्रेरित किया। अदालत ने इस स्वीकारोक्ति और अन्य सबूतों को आधार मानते हुए न्याय सुनिश्चित किया।

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह निर्णय न केवल एक हाई-प्रोफाइल मामले का अंत है, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सत्ता के पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही को लेकर एक कड़ा संदेश भी है। फिलहाल अदालत के विस्तृत फैसले की प्रति का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन 10 साल की यह सजा तरुण तेजपाल के करियर और सार्वजनिक जीवन पर एक अमिट दाग की तरह है।

Follow Navbharatlive whatsapp