August 1, 2026

हर खेत तक पानी पहुंचाने का दावा कितना सफल? प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के 10 साल का रिपोर्ट कार्ड

हर खेत तक पानी पहुंचाने का दावा कितना सफल? प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के 10 साल का रिपोर्ट कार्ड

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

देश की तकरीबन 60 प्रतिशत जनसंख्या खेती-किसानी पर निर्भर हैं. लेकिन अनियमित मानसून, सूखा और भूजल पर बढ़ती निर्भरता किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार की तरफ से 2015-16 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की गई थी.

जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 से अब तक योजना के विभिन्न घटकों के तहत 36.22 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता विकसित की गई है. तकरीबन 23.42 लाख हेक्टेयर कमांड एरिया विकसित किया गया है. इसके अलावा 114.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को माइक्रो इरिगेशन से जोड़ा गया है.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एक अम्ब्रेला योजना है. इसकी शुरुआत 2015-16 में हुई. इसका उद्देश्य हर खेत को पानी पहुंचाना और उपलब्ध पानी सही तरीके से इस्तेमाल करना है.जल शक्ति मंत्रालय के तहत इसके दो प्रमुख घटक लागू किए जा रहे हैं.त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) और हर खेत को पानी (HKKP).

Pradhanmantri Krishi Sinchayi Yojana

  • कमांड एरिया डेवलपमेंट और वाटर मैनेजमेंट (CAD&WM)
  • लघु सतही सिंचाई परियोजनाएं (SMI)
  • जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं पुनर्स्थापन (RRR)

10 साल में कितनी बढ़ी सिंचाई क्षमता?

जलशक्ति मंत्रालय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि अप्रैल 2016 से मई 2026 तक त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) के तहत 30.66 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता बनाई गई. HKKP-SMI के तहत 4.29 लाख हेक्टेयर क्षमता विकसित हुई. हर खेत को पानी, जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं पुनर्स्थापन (HKKP-RRR) के तहत 1.27 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बहाल की गई. कुल मिलाकर 36.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ी. इसी अवधि में कमांड एरिया डेवलपमेंट और वाटर मैनेजमें (CAD&WM) के तहत 23.42 लाख हेक्टेयर कमांड एरिया विकसित किया गया.

अगर केवल पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) की बात करें तो

  • त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP): 4.09 लाख हेक्टेयर
  • लघु सतही सिंचाई परियोजनाएं (SMI): 0.96 लाख हेक्टेयर
  • जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण (RRR) : 0.41 लाख हेक्टेयर
  • कमांड एरिया डेवलपमेंट (CAD&WM): 3.76 लाख हेक्टेयर

2016 से अब तक किस योजना पर कितना खर्च हुआ?

  • AIBP 21,823.46 करोड़ रुपये
  • HKKP-SMI 5,917.82 करोड़ रुपये
  • HKKP-RRR 781.76 करोड़ रुपये
  • CAD&WM 3,386.08 करोड़ रुपये

केवल इन चार घटकों पर केंद्र सरकार ने करीब 31,909 करोड़ रुपये की सहायता दी है.

माइक्रो इरिगेशन को कितना बड़ा बढ़ावा मिला?

सरकार का कहना है कि केवल बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर ही नहीं, बल्कि पानी की बचत वाली तकनीकों पर भी जोर दिया गया. पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC) योजना के तहत 114.60 लाख हेक्टेयर भूमि को माइक्रो इरिगेशन से जोड़ा गया है. इसके अलावा 9,434 वाटरशेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बारिश के जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देना है.

सूखा प्रभावित इलाकों पर सरकार का कितना फोकस

2015-16 से 59 परियोजनाएं ऐसे क्षेत्रों के लिए मंजूर हुईं. इनमें 4 परियोजनाएँ बुंदेलखंड क्षेत्र की हैं. इन परियोजनाओं से 16.65 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित हुई. अकेले बुंदेलखंड में 0.97 लाख हेक्टेयर क्षमता तैयार की गई।सरकार ने 2021-22 में नियमों में बदलाव भी किया. अब अगर किसी परियोजना का 50% से अधिक कमांड एरिया सूखा प्रभावित क्षेत्र में है, तो उसे शुरुआती चरण से ही PMKSY में शामिल किया जा सकता है और केंद्र-राज्य फंडिंग अनुपात 60:40 रखा गया है. इसके बाद ऐसे 5 और प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं, जिनका लक्ष्य 2.44 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित करना है. इनमें अब तक 0.61 लाख हेक्टेयर क्षमता तैयार हो चुकी है.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा परियोजनाएं हैं?

साल 2016 से मई 2026 तक त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम+कमांड एरिया डेवलपमेंट के तहत 125 परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, जिनमें से 71 पूरी हो चुकी हैं. लघु सतही सिंचाई परियोजनाएं और जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण के तहत 8,338 परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, जिनमें से 5,414 पूरी हो चुकी हैं.

त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम परियोजनाएं

  • महाराष्ट्र में 29 परियोजनाएं हैं
  • मध्य प्रदेश में 21 परियोजनाएं
  • तेलंगाना में 11 परियोजनाएं

लघु सतही सिंचाई परियोजनाएं और जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण परियोजनाएं

  • असम: 1,119
  • अरुणाचल प्रदेश: 1,097
  • उत्तराखंड: 1,073
  • ओडिशा: 677
  • नागालैंड: 663

सरकार का दावा कितना मजबूत?

सरकार का कहना है कि PMKSY से केवल सिंचाई का दायरा नहीं बढ़ा, बल्कि किसानों के बीच पानी के उपयोग की योग्यता बढ़ी. खेत तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हुई, माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा मिला. जल संरक्षण बेहतर हुआ. सिंचाई में पानी की बर्बादी घटी. कृषि उत्पादकता बढ़ी है. इसका साफ मतलब है कि 11 साल पहले शुरू हुई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अब देश की सबसे बड़ी सिंचाई योजनाओं में शामिल हो चुकी है.

सचिन धर दुबे

सचिन धर दुबे

सचिन धर दुबे को डिजिटल पत्रकारिता में करीब 7 साल का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में न्यूज 18 से की. फिर गांव कनेक्शन, ANI, आजतक होते हुए अब TV9 Hindi तक पहुंचे. न्यूज 18 में असाइनमेंट पर कॉपी एडिटर, गांव कनेक्शन में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, ANI में कंटेंट राइटर और आजतक में सीनियर सब एडिटर पद पर काम किया. सचिन ने कृषि पत्रकारिता में काफी समय बिताया. उनकी राजनीति, विश्व, स्पोर्ट्स, हिस्ट्री ओरिएंटेड विषयों पर लिखने में काफी इंटरेस्ट है. सचिन ने गांव कनेक्शन में रहते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से Msc इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले हैं.

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