August 12, 2026

सड़क हादसे के बाद मरीज को 1 घंटे में पहुंचाना होगा अस्पताल, NHAI का ये नया नियम तोड़ने पर कटेगा भारी चालान

NHAI Rules: नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और हादसे के वक्त तुरंत इलाज मुहैया कराने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया है. अक्सर देखा जाता है कि सड़क पर दुर्घटना होने के बाद एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती, जिससे घायलों की जान खतरे में पड़ जाती है. इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए NHAI ने अब एम्बुलेंस सेवाओं के लिए बेहद कड़े नियम और समय सीमा लागू कर दी है. अगर ठेकेदार या एम्बुलेंस चालक इन नियमों का पालन करने में लापरवाही बरतते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

एक एक मिनट का रखा जाएगा हिसाब

सड़क हादसों के दौरान घायलों को शुरुआती एक घंटे के भीतर इलाज मिलना सबसे जरूरी होता है. चिकित्सा विज्ञान में इसे गोल्डन आवर कहा जाता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए नए सर्कुलर में हर एक मिनट का हिसाब तय किया गया है. जब भी कंट्रोल रूम से इमरजेंसी कॉल यानी टिकट जनरेट होगा, तो एम्बुलेंस टीम को उसे एक मिनट के अंदर स्वीकार करना अनिवार्य होगा. अगर कॉल स्वीकार करने में एक मिनट से ज्यादा की देरी होती है, तो हर अतिरिक्त मिनट के हिसाब से ठेकेदार पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. कॉल स्वीकार करने के बाद दो मिनट के अंदर एम्बुलेंस को मौके के लिए रवाना होना पड़ेगा. अगर रवानगी में भी देरी होती है, तो उसमें भी प्रति मिनट 5 हजार रुपये के हिसाब से कटौती की जाएगी.

अस्पताल पहुंचाने के लिए तय हुआ समय

घटनास्थल पर पहुंचने के लिए भी NHAI ने दूरी के हिसाब से स्पष्ट मानक तैयार किए हैं. अगर हादसा एम्बुलेंस के बेस स्टेशन से 10 किलोमीटर के दायरे में हुआ है, तो एम्बुलेंस को किसी भी हाल में 10 मिनट के भीतर वहां पहुंचना होगा. इस तय समय से ज्यादा समय लगने पर सीधे 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोका जाएगा. अगर दूरी 10 किलोमीटर से अधिक है, तो उसी अनुपात में तय समय सीमा बढ़ाई जाएगी. सबसे महत्वपूर्ण नियम घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने को लेकर बनाया गया है. हादसे के बाद मरीज को अधिकतम एक घंटे के अंदर पास के अस्पताल में भर्ती कराना होगा, ताकि उसकी जान बचाई जा सके. इस काम में देरी होने पर भी 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा. इसके अलावा, अगर कोई एम्बुलेंस चालक इमरजेंसी टिकट को स्वीकार करने से ही साफ मना कर देता है, तो उस पर हर मामले के हिसाब से 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.

जीपीएस और ऐप को लेकर भी रहेगी सख्ती

केवल समय पर पहुंचना ही काफी नहीं होगा, बल्कि एम्बुलेंस की तकनीकी व्यवस्था और मेडिकल सुविधाओं की निगरानी भी ऐप के जरिए की जाएगी. NHAI ने जीपीएस और मोबाइल ऐप के इस्तेमाल को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अगर जांच के दौरान किसी एम्बुलेंस का जीपीएस बंद पाया जाता है, वह CARE ऐप पर ऑनलाइन नहीं दिखती है या फिर डैशबोर्ड पर उसकी स्थिति की जानकारी नहीं मिलती, तो ऐसी स्थिति में ठेकेदार पर रोजाना 2500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. इसके साथ ही, हाईवे अधिकारियों द्वारा एम्बुलेंस के निरीक्षण के दौरान यदि एम्बुलेंस में जरूरी दवाइयां, मेडिकल उपकरण, प्रशिक्षित ड्राइवर या इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन यानी EMT की कमी पाई जाती है, तो प्रति निरीक्षण 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया जाएगा.

रोजाना करना होगा गाड़ियों का ड्राई रन

एम्बुलेंस हमेशा चालू हालत में रहे, इसके लिए भी एक खास प्रावधान किया गया है. हर एम्बुलेंस को 24 घंटे के भीतर कम से कम एक बार ड्राई रन या मॉक ड्रिल करना अनिवार्य होगा, जिसके तहत गाड़ी को कम से कम 5 किलोमीटर चलाकर देखना होगा. हालांकि, यदि उसी दिन वह एम्बुलेंस किसी असली हादसे के दौरान 5 किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी है, तो उस दिन के लिए यह शर्त माफ रहेगी. इसके साथ ही सीमा का बहाना बनाने वाले ठेकेदारों पर भी रोक लगाई गई है. अब अगर पड़ोसी हाईवे सेक्शन में कोई एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो दूसरी एम्बुलेंस को अपने तय इलाके से बाहर जाकर भी हादसे की जगह पर मरीज को लेने जाना होगा.

कंपनी के बिलों से सीधे काटा जाएगा जुर्माना

यह पूरी जुर्माना प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल होगी. NHAI का CARE सिस्टम अपने आप जुर्माने की पूरी गणना करेगा. जुर्माने की यह राशि एम्बुलेंस सेवा देने वाली कंपनी के मासिक भुगतान, EPC प्रोजेक्ट्स के तिमाही मेंटेनेंस भुगतान या HAM प्रोजेक्ट्स के छमाही भुगतान से सीधे काट ली जाएगी. हालांकि, ठेकेदारों को राहत देने के लिए एक सीमा तय की गई है कि किसी भी स्थिति में एक महीने का कुल जुर्माना 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकता.

सुप्रीम कोर्ट और सीएजी की रिपोर्ट के बाद लिया फैसला

NHAI के अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय से जीपीएस और ऐप के इस्तेमाल में लापरवाही देखी जा रही थी, जिससे सिस्टम को सही समय पर जानकारी नहीं मिलती थी. सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति और सीएजी के ऑडिट में भी एम्बुलेंस की देरी का मुद्दा कई बार उठाया जा चुका था. इसी वजह से आम लोगों की जान की रक्षा करने और हाईवे पर आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अब यह सख्त कदम उठाया गया है.

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