ग्वालियर2 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

SMA Type-2 से जूझ रही नीलाक्षी।
ग्वालियर के विनय नगर सेक्टर-4 की 1.5 साल की नीलाक्षी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA Type-2) से जूझ रही है। शुरुआती 12 से 13 महीने तक उसमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखे, लेकिन 15-16 महीने की उम्र में वह खड़ी नहीं हो पाई। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी जान बचाने और सामान्य जिंदगी देने के लिए करीब 15 से 17 करोड़ रुपए के ‘जोलगेन्स्मा’ (Zolgensma) जीन थेरेपी इंजेक्शन की जरूरत है। परिवार ने सरकार, प्रशासन और समाज से मदद की अपील की है
15-16 महीने में खड़ी नहीं हो पाई
नीलाक्षी के पिता सौरभ भार्गव ने बताया कि शुरुआती 12 से 13 महीनों तक बच्ची में बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखा। परिवार को लगा कि कुछ बच्चे सामान्य से थोड़ी देर से चलना शुरू करते हैं, इसलिए नीलाक्षी भी समय के साथ चलने लगेगी।
उन्होंने कहा, “जब बेटी 15-16 महीने की हुई और खड़ी नहीं हो पाई, तब हमें चिंता हुई। पहले वह खुद उठकर बैठ जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी शारीरिक ग्रोथ रुकने लगी और डाउनफॉल आने लगा। अब वह उठकर बैठ भी नहीं पाती।”

मां के साथ टीवी पर कार्टून देखते बच्ची नीलाक्षी
ग्वालियर से गुरुग्राम तक कराया इलाज
ग्वालियर में डॉक्टर विजय गुप्ता से परामर्श के बाद पिता सौरभ बच्ची को मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम ले गए। वहां न्यूरो पीडियाट्रिशियन डॉ. अंकुश ने शुरुआती जांचों के बाद SMA Gene Test कराने की सलाह दी।
इस टेस्ट की रिपोर्ट आने में 15 दिन लगे। हाल ही में आई रिपोर्ट में SMA Type-2 की पुष्टि हुई।
SMN1 जीन की कमी से होती है बीमारी
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) शरीर के उस SMN1 जीन की कमी के कारण होती है, जो मांसपेशियों की गति और ताकत को नियंत्रित करता है। समय के साथ यह बीमारी शरीर की सभी एक्टिव मांसपेशियों को बेजान बना देती है।
डॉक्टरों के अनुसार, बीमारी को रोकने के लिए जीन थेरेपी का इंजेक्शन ही एकमात्र जरिया है। इसकी कीमत 15 से 17 करोड़ रुपए के बीच होती है।
यह इंजेक्शन जितनी कम उम्र में लगाया जाए, उतना ही प्रभावी होता है। परिवार के मुताबिक, समय रहते थेरेपी नहीं मिलने पर बच्ची कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएगी।
क्राउडफंडिंग से जुटाए जा रहे रुपए
परिवार के पास इतनी बड़ी रकम जुटाने का कोई निजी संसाधन नहीं है। इसके लिए सोशल मीडिया और क्राउडफंडिंग के जरिए मुहिम शुरू की गई है।
Verified प्लेटफॉर्म ImpactGuru के माध्यम से फंडरेजिंग शुरू की गई है। अभी तक करीब 17 लाख रुपए जमा हो पाए हैं, जो कुल लक्ष्य का महज 1 प्रतिशत है।
पिता को सरकार से मदद की उम्मीद
आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिता सौरभ भार्गव ने मध्य प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और प्रधानमंत्री कार्यालय से विशेष सहायता की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि सरकारी और सामाजिक सहयोग से ही मासूम की जान बचाई जा सकती है।
किट्सीन सेंटर ने थेरेपी फीस माफ की
ग्वालियर के गोविंदा फाटक स्थित ‘किट्सीन’ (KitsIn) थेरेपी सेंटर की संचालिका ने मानवीय पहल करते हुए बच्ची की पूरी थेरेपी फीस माफ कर दी है। हालांकि, जीन थेरेपी का मुख्य इंजेक्शन लगाने के लिए समाज के हर वर्ग के सहयोग की जरूरत है।
मां बोली- दूसरे बच्चों को देखकर कलेजा बैठ जाता है
नीलाक्षी की मां ने दैनिक भास्कर से रोते हुए कहा, “आज से एक महीने पहले तक सब कुछ सामान्य लग रहा था। अब जब मैं दूसरे बच्चों को हंसते, खेलते और दौड़ते देखती हूं, तो मेरा कलेजा बैठ जाता है। वह अहसास मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती। बीइंग ए मदर यानी एक मां होने के नाते मैं सबसे सिर्फ यही गुहार लगा सकती हूं कि प्लीज, मेरी बच्ची को बचाने में जितनी मदद हो सके, करिए।”
ImpactGuru से कर सकते हैं सहयोग
नीलाक्षी के लिए ImpactGuru प्लेटफॉर्म के जरिए योगदान किया जा सकता है। न्यूनतम सहयोग ₹100 या उससे अधिक रखा गया है।आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत टैक्स छूट उपलब्ध है। दान के तुरंत बाद IMPACTGURU.COM/payments से रसीद डाउनलोड की जा सकती है।
.