
1 करोड़ बुजुर्ग गरीबी में जीने को मजबूर
अमेरिका में बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति को लेकर एक अलग ही तस्वीर सामने आई है, जो बेहद चौंकाने वाली है. जिसे ‘हाउस-रिच, कैश-पूर’ (House-Rich, Cash-Poor) कहा जाता है. इसके तहत अमेरिका के करीब 1 करोड़ बुजुर्ग (सीनियर सिटीजंस) गरीबी में जीने को मजबूर हैं, भले ही उनके पास अपने महंगे घर क्यों न हों.
अमेरिकी में बुजुर्ग नागरिकों के पास आवास संबंधी अपार संपत्ति है. वहीं दूसरी तरफ उनमें गरीबी बढ़ रही है. देश में 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के लाखों बुजुर्गों के पास घरों के रूप में बड़ी संपत्ति है बावजूद इसके करीब 1 करोड़ अमेरिकी गरीबी में जिंदगी गुजार रहे. उनकी गरीबी दर 15.4% तक पहुंच गई जो किसी भी आयु वर्ग में सबसे ज्यादा है.
1 करोड़ अमेरिकी गरीबी में जी रहे
U.S. सेंसस ब्यूरो के डेटा पर AARP फाउंडेशन के नए विश्लेषण के अनुसार 2025 में ‘सप्लीमेंटल पॉवर्टी मेजर’ (गरीबी मापने का एक तरीका) के तहत 65 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लगभग 1 करोड़ अमेरिकी गरीबी में जी रहे . उनकी गरीबी दर 15.4% तक पहुंच गई जो किसी भी उम्र के ग्रुप में सबसे ज्यादा है. ये नतीजे अमेरिका में बढ़ती उम्र से जुड़ी आम धारणा के उलट हैं. माना जाता है कि पुरानी पीढ़ियों ने बहुत ज्यादा संपत्ति जमा की है, जिसमें से ज्यादातर उनके घरों में है और उम्मीद है कि आने वाले दशकों में वो अपने वारिसों को खरबों डॉलर सौंपेंगे.
जोएल बर्नर ने क्या कहा
Realtor.com के सीनियर इकोनॉमिस्ट जोएल बर्नर का कहना है कि ये आंकड़े लोगों के बहुत अलग-अलग समूहों के बारे में बताते हैं. उनका कहना है ‘यहां दो बातें काम कर रही हैं. पहली बात, कुल संपत्ति के ये आंकड़े ज्यादातर ज़्यादा नेट वर्थ वाले सीनियर लोगों की तरफ झुके हुए हैं. जिन सीनियर लोगों के पास अपना घर नहीं है, उनके गरीबी की स्थिति का सामना करने की संभावना ज्यादा होती है, इसलिए सीनियर आबादी के अलग-अलग हिस्सों के लिए दोनों ही बातें सच हो सकती हैं’.घर का मालिक होना भी ज़रूरी नहीं कि इस विरोधाभास को हल कर दे.
बर्नर कहते हैं ‘दूसरी बात, घर के मालिक सीनियर लोगों के मामले में भी उनकी हाउसिंग वेल्थ (घर से जुड़ी संपत्ति) ऐसी होती है जिसे आसानी से कैश में नहीं बदला जा सकता (illiquid). जब तक घर बेचा न जाए या उस पर लोन न लिया जाए, तब तक उससे किराने का सामान या यूटिलिटी बिल का भुगतान नहीं किया जा सकता, इसलिए कई सीनियर लोग घर के मामले में तो अमीर होते हैं, लेकिन कैश के मामले में गरीब’.
आंकड़ों में बढ़ोतरी
अमेरिका में बुजुर्गों की गरीबी को मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग पैमाने भी इस अंतर को दिखाते हैं सरकार के आधिकारिक गरीबी मापदंड के मुताबिक, 2025 में 65 साल और उससे अधिक उम्र के 9.8 प्रतिशत लोग गरीबी में थे. यह संख्या करीब 64 लाख थी. वहीं सप्लीमेंटल पॉवर्टी मेजर के तहत यह आंकड़ा बढ़कर 15.4 प्रतिशत यानी करीब 1 करोड़ लोगों तक पहुंच गया.
सप्लीमेंटल पॉवर्टी मेज़र (SPM) में मेडिकल खर्च जैसे ऐसे खर्चों को भी शामिल किया जाता है, जिनका असर बुजुर्गों पर काफी ज्यादा पड़ता है. मेडिकेयर जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद बुजुर्गों को अपनी जेब से भी बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती है. गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए ये खर्च उनकी बची हुई आय को तेजी से खत्म कर सकते हैं.
वहीं सिर्फ गरीबी के आंकड़े ही आर्थिक दबाव की गंभीरता को पूरी तरह नहीं दर्शाते. यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैसाचुसेट्स बोस्टन के ‘एल्डर इंडेक्स’ के अनुसार, 2025 में अकेले रहने वाले आधे से ज़्यादा (53%) बुजुर्ग और बुजुर्ग जोड़ों के एक-चौथाई (25%) हिस्से की आय उनकी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं थी. 2022 के मुकाबले अकेले रहने वाले बुजुर्गों के मामले में यह आंकड़ा 5 प्रतिशत अंक और बुजुर्ग दंपतियों के मामले में 4 प्रतिशत अंक बढ़ा है. इस इंडेक्स का मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि कोई व्यक्ति गरीबी में है या नहीं बल्कि यह पता लगाना भी है कि उसकी आय सम्मानजनक और बुनियादी जीवन जीने के लिए पर्याप्त (adequacy) है या नहीं।
मॉर्गेज (होम लोन) वाले अकेले बुजुर्ग घर-मालिक के लिए बुनियादी खर्चों को पूरा करने के लिए जरूरी आय 2022 में $36,300 से बढ़कर 2025 में $39,396 हो गई. इस बढ़ोतरी में लगभग दो-तिहाई हिस्सा घर से जुड़े बढ़ते खर्चों का था. बिना मॉर्गेज वाले घर-मालिक भी इससे अछूते नहीं रहे. उस दौरान उनके घर से जुड़े खर्चों में लगभग 14% की बढ़ोतरी हुई, क्योंकि घर के मालिकाना हक से जुड़े खर्च बढ़ गए थे.
प्रॉपर्टी टैक्स में 2019 और 2025 के बीच 31% की बढ़ोतरी
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ‘जॉइंट सेंटर फ़ॉर हाउसिंग स्टडीज़’ की ‘2026 स्टेट ऑफ़ द नेशंस हाउसिंग’ रिपोर्ट के अनुसार, सभी घर-मालिकों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स में 2019 और 2025 के बीच 31% की बढ़ोतरी हुई, जबकि घर-मालिकों के लिए औसत मासिक बीमा प्रीमियम में 72% का उछाल आया. जिन घर-मालिकों का घर पूरी तरह से कर्ज़-मुक्त (free and clear) था, उनके लिए घर से जुड़े औसत खर्चों में 2019 और 2024 के बीच 35% की बढ़ोतरी हुई, जबकि घर-मालिकों की आय में 23% की बढ़ोतरी हुई थी.
AARP पब्लिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट में फाइनेंशियल सिक्योरिटी के वाइस प्रेसिडेंट रिचर्ड जॉनसन कहते हैं कि बढ़ती लागत हर तरह के परिवारों की कमाई पर असर डाल रही है और ज़्यादा उम्र के अमेरिकी इस कमी को बहुत ज़्यादा महसूस कर रहे हैं.और जब कमाई इन खर्चों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं होती, तो घर में बनी इक्विटी (घर की कीमत में आपकी हिस्सेदारी) एक और जरिया बन सकती है. रिसर्च से पता चलता है कि आखिरकार बहुत से लोग ऐसा करते भी हैं.
बोस्टन कॉलेज के सेंटर फ़ॉर रिटायरमेंट रिसर्च के अनुसार, जिन परिवारों के पास शुरुआत में कम से कम $100,000 की निवेश योग्य संपत्ति थी, उनमें से 40% से ज़्यादा लोगों ने रिटायरमेंट के दौरान अपनी होम इक्विटी का इस्तेमाल किया-या तो घर के बदले लोन लेकर या फिर कम कीमत वाले घर में जाकर.
सेंटर की एक अलग रिसर्च में पाया गया कि लंबे समय तक देखभाल (long-term-care) का खर्च भी इसकी एक वजह हो सकती है. 2025 की एक स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक देखभाल के अचानक बढ़े खर्चों के कारण रिटायर हुए लोगों को अपनी होम इक्विटी का इस्तेमाल करना पड़ा और इससे उनके वारिसों के लिए छोड़ी जाने वाली संपत्ति की उम्मीद भी कम हो गई.
ये खर्च आम रिटायरमेंट इनकम पर बहुत भारी पड़ सकते हैं. हार्वर्ड की रिसर्च के अनुसार, जिन परिवारों में कोई व्यक्ति 75 साल या उससे ज़्यादा उम्र का था, उनमें से केवल 24% परिवारों के पास ही रोजमर्रा के खर्चों के बाद इतनी कमाई बचती थी कि वो किसी पेड होम हेल्थ एड (घर पर देखभाल करने वाले) की रोजाना एक विज़िट का खर्च उठा सकें. लेकिन हाउसिंग वेल्थ (घर से जुड़ी संपत्ति) का इस्तेमाल करने का एक सबसे साफ तरीका बड़े घर को बेचकर छोटे और सस्ते घर में जाना ज़रूरी नहीं कि आसान हो.
बर्नर के मुताबिक ‘घरों की कमी की वजह से युवा पीढ़ी घर की मालिक नहीं बन पा रही है, लेकिन इसका असर बड़ी उम्र की पीढ़ी पर भी पड़ता है. घर के मालिकों के लिए घर छोड़ने और लिक्विडिटी (नकदी) की चिंताएं होती हैं और किराए पर रहने वाले बुजुर्गों के लिए तय आमदनी में किराया बढ़ना एक समस्या है’. सैद्धांतिक रूप से घर के मालिक कई बुजुर्ग छोटे घर में जा सकते हैं और अपनी होम इक्विटी का कुछ हिस्सा कैश में बदल सकते हैं, लेकिन मार्केट में ऐसा करने के ज़्यादा मौके नहीं हैं (ठीक वैसे ही जैसे पहली बार घर खरीदने वालों के लिए ज्यादा मौके नहीं होते) क्योंकि छोटे घरों (स्टार्टर होम) की सप्लाई बहुत कम है. इसके बजाय वो बड़े घरों में ही फंसे रह जाते हैं जिनका रखरखाव महंगा होता है, जिससे कैश फ्लो की और समस्याएं पैदा होती हैं.
किराए पर रहने वाले बुजुर्गों के पास तो इक्विटी होती ही नहीं है जिसे वो कैश में बदल सकें. हार्वर्ड के मुताबिक 2023 में, 65 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों के नेतृत्व वाले 58% किराएदार परिवारों पर घर के खर्च का भारी बोझ था. यह संख्या लगभग 45 लाख परिवारों के बराबर है.
अमेरिका में आने वाले दशकों में बड़ी मात्रा में संपत्ति अगली पीढ़ी को हस्तांतरित होने की उम्मीद है. सेरुली एसोसिएट्स का अनुमान है कि 2048 तक 124 ट्रिलियन डॉलर का हस्तांतरण होगा, जिसमें से 105 ट्रिलियन डॉलर वारिसों को मिलेंगे, लेकिन कुल रकम का आधे से ज़्यादा हिस्सा बहुत ज्यादा नेट वर्थ वाले परिवारों से आने की उम्मीद है, जो कुल परिवारों का सिर्फ़ 2% हैं. बाकी सभी लोगों के लिए, बढ़ती उम्र और घर के बढ़ते खर्च का मतलब यह हो सकता है कि उस संपत्ति का कुछ हिस्सा पहले ही खर्च करना पड़ जाए.

जूही उरूषा खान
जूही उरूषा खान पिछले 12 साल से पत्रकारिता से जुड़ी हुई हैं. भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से फिल्म जर्नलिज्म की पढ़ाई की. इसके बाद दिल्ली आकर BAG में एंटरटेनमेंट बीट पर इंटर्नशिप की. बाद में CNEB न्यूज चैनल में एंटरटेनमेंट बीट में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया, साथ ही प्रोग्रामिंग को भी देखा.<p></p>CNEB के बाद VOICE OF INDIA में एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर काम करना शुरू किया. यहां से फिर जनसंदेश न्यूज चैनल के साथ जुड़ीं और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके बाद 4 REAL NEWS चैनल में करीब चार साल न्यूज के साथ ही प्रोग्रामिंग और धार्मिक शोज पर काम किया.<p></p>यहां से राज्यसभा टीवी का रुख किया और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके साथ ही एंकरिंग करना भी शुरू की. इसके बाद सूर्या समाचार में प्रोग्रामिंग में एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर प्रोड्यूसर काम किया.<p></p>जी बिहार झारखंड में भी काम करने का अनुभव है. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष से जुड़ी हुई हैं.
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