हेल्थ सेक्टर में सही टेक्नोलॉजी और बेहतर प्लानिंग से सरकार को बड़े लेवल पर फायदा मिल सकता है. भारत सरकार के हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इन इंडिया प्रोग्राम के तहत जांचे गए चार हेल्थ प्रोग्राम पर हुई एक नई स्टडी में इसका बड़ा उदाहरण सामने आया है. रिसर्च के मुताबिक, इन टेक्नोलॉजी और हेल्थ प्रोग्राम पर खर्च करने से न सिर्फ लोगों की सेहत में सुधार हुआ, बल्कि इनके बदले मिलने वाला आर्थिक फायदा भी काफी ज्यादा रहा. इनमें एक प्रोग्राम में 1 रुपये के अतिरिक्त निवेश पर 3,906 रुपये का आर्थिक फायदा मिला. ये फायदा अनुमानित आर्थिक वैल्यू है. इसके ऐसे समझिए कि मान लीजिए किसी टेक्नोलॉजी से 100 लोगों की बीमारी समय पर पकड़ ली गई. इससे कुछ लोगों की जान बची, लोग ज्यादा साल स्वस्थ रहे, काम से छुट्टी कम हुई और इलाज का बोझ घटा. इन सभी फायदों की अनुमानित आर्थिक वैल्यू रिसर्च में निकाली गई है, जो खर्च से 3,906 गुना ज्यादा बैठी है. यानी जिन हेल्थ प्रोग्राम में पैसा लगाया गया, उनसे लागत के मुकाबले काफी ज्यादा हेल्थ और आर्थिक वैल्यू मिलने का अनुमान रहा. आइए इस रिसर्च को एकदम आसान भाषा में समझते हैं.
नेचर डॉट कॉम में छपी रिसर्च में चार अलग-अलग हेल्थ प्रोग्राम का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) निकाला गया. आसान भाषा में इसका मतलब है कि सरकार या हेल्थ सिस्टम ने किसी प्रोग्राम पर जितना अतिरिक्त खर्च किया, उसके बदले समाज को कितना हेल्थ और आर्थिक फायदा मिला. यह किसी व्यक्ति के लिए निवेश या कमाई का प्लान नहीं है. इसका इस्तेमाल यह समझने के लिए किया गया है कि पब्लिक हेल्थ में पैसा लगाने से समाज को कितनी वैल्यू मिलती है. रिसर्चर्स ने हर इंटरवेंशन की अतिरिक्त लागत की तुलना उससे मिलने वाले हेल्थ बेनिफिट से की है. इसमें बचाए गए लाइफ ईयर, टाले गए DALY और हासिल किए गए QALY जैसे हेल्थ बेनिफिट शामिल थे, जिनके आधार पर आर्थिक वैल्यू निकाली गई. वैल्यू का गणित समझने से पहले इस्तेमाल हुए शब्दों को भी आसान भाषा में समझ लेते हैं.

यहां Life Year का मतलब है किसी व्यक्ति की जिंदगी का बचाया गया एक साल. वहीं, DALY का मतलब बीमारी, विकलांगता या समय से पहले मौत की वजह से खोए हुए स्वस्थ जीवन के साल हैं. यानी DALY कम होना बेहतर हेल्थ रिजल्ट को दिखाता है. दूसरी तरफ QALY यानी क्वालिटी-एडजस्टेड लाइफ ईयर यह बताता है कि इलाज के बाद व्यक्ति को कितने साल और कितनी अच्छी हेल्थ के साथ जिंदगी मिली. उदाहरण के लिए, पूरी तरह स्वस्थ 1 साल को 1 QALY माना जाता है, जबकि 50% हेल्थ-क्वालिटी में बिताया गया 1 साल 0.5 QALY के बराबर होगा. इन हेल्थ बेनिफिट को आर्थिक वैल्यू में बदलने के लिए रिसर्च में भारत की प्रति व्यक्ति GDP 2,235.35 डॉलर को आधार बनाया गया है.
चार प्रोग्राम, चार अलग-अलग फायदे
- पोर्टेबल ECG मशीन- रिसर्च में पहला प्रोग्राम पोर्टेबल ECG मशीन पर बनाया गया है. इसमें अहमदाबाद जिले के 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी PHC में हाई-रिस्क लोगों की जांच के लिए पोर्टेबल ECG मशीन का इस्तेमाल किया गया. इस सुविधा की पहुंच 12,105 लोगों तक रही. इनमें 10,241 गर्भवती महिलाएं, 1,836 हाई-रिस्क एडल्ट और 26 बच्चे शामिल थे. कॉस्ट-इफेक्टिवनेस एनालिसिस में हाई-रिस्क एडल्ट को शामिल किया गया. इनमें 73 लोगों में ECG की गड़बड़ी मिली और 20 लोगों का इलाज किया गया. हर व्यक्ति पर औसतन 79.56 डॉलर की अतिरिक्त लागत आई और इससे करीब 2.9 लाइफ ईयर बचाए गए. यानी एक लाइफ ईयर बचाने की लागत सिर्फ 27.47 डॉलर रही. इस प्रोग्राम का ROI 3,906:1 रहा. यानी इसमें 1 रुपये का जो खर्च हुआ, उसके बदले फायदे की वैल्यू 3,906 रुपये रही, जो रिसर्च में शामिल बाकी 3 प्रोग्रामों से ज्यादा है.
- TeCHO+- गुजरात के देवभूमि द्वारका, पंचमहल और साबरकांठा के 48 सब-सेंटर्स में TeCHO+ मोबाइल-वेब ऐप का इस्तेमाल किया गया. इसका मकसद हेल्थ वर्कर्स को मरीज को सर्विस देते समय उसी समय डिजिटल डेटा दर्ज करने की सुविधा देना था. इससे गंभीर एनीमिया, प्रेग्नेंसी से जुड़ा हाई ब्लड प्रेशर और गंभीर कुपोषण जैसे हाई-रिस्क मामलों की पहचान बेहतर तरीके से हो सकी. इस प्रोग्राम में एक DALY टालने की लागत 21.54 डॉलर रही. यानी बीमारी या समय से पहले मौत की वजह से खोए जाने वाले एक स्वस्थ जीवन-वर्ष को बचाने में 21.54 डॉलर की अतिरिक्त लागत आई. इसका ROI 30.3:1 रहा.
- IVIS- गुजरात के बनासकांठा और देवभूमि द्वारका जिलों में प्रेग्नेंसी के 14 से 18 हफ्ते के दौरान मीडियम से गंभीर एनीमिया वाली महिलाओं पर IV आयरन थेरेपी का इस्तेमाल किया गया. सामान्य ओरल आयरन थेरेपी की तुलना में IV आयरन सुक्रोज पर प्रति QALY सिर्फ 9.36 डॉलर की अतिरिक्त लागत आई. यानी इलाज के जरिए एक अतिरिक्त क्वालिटी-एडजस्टेड लाइफ ईयर हासिल करने की अतिरिक्त लागत 9.36 डॉलर रही. यह भारत की प्रति व्यक्ति आय का करीब 0.49% है. स्टडी के मुताबिक, WHO के कॉस्ट-इफेक्टिवनेस मानकों के हिसाब से यह काफी बेहतर इन्वेस्टमेंट रहा. इसका ROI 8.5:1 रहा.
- TB मरीजों की दवा लेने की निगरानी- महाराष्ट्र के नासिक शहर में 400 नए TB मरीजों पर TMEAD डिजिटल दवा-पालन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया. आधे मरीजों को TMEAD डिवाइस दी गई, जबकि बाकी मरीजों को सामान्य इलाज मिला. छह महीने की मॉनिटरिंग में TMEAD ग्रुप में मरीजों का दवा लेने का अनुपालन बेहतर पाया गया. इस प्रोग्राम में प्रति QALY लागत 138.62 डॉलर रही. यानी एक अतिरिक्त क्वालिटी-एडजस्टेड लाइफ ईयर हासिल करने की अतिरिक्त लागत 138.62 डॉलर रही. यह भारत की प्रति व्यक्ति GDP से कम है. इसका ROI 25.1:1 रहा.
3,906 रुपये का मतलब सीधे कैश रिटर्न नहीं
यहां एक बात और समझनी होगी कि ROI के आंकड़ों को सीधे कैश रिटर्न समझना सही नहीं होगा. रिसर्चर्स ने इन आंकड़ों का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया है कि हेल्थ बेनिफिट की आर्थिक वैल्यू कितनी हो सकती है. चारों प्रोग्राम का टारगेट, स्केल और हेल्थ बेनिफिट मापने का तरीका अलग-अलग था. इसलिए इनके ROI को सीधे एक-दूसरे से बेहतर या खराब नहीं माना जा सकता. उदाहरण के लिए, ECG स्क्रीनिंग का ROI 3,906:1 बहुत बड़ा दिखता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह बाकी तीन प्रोग्राम से हर लिहाज से बेहतर है.
हेल्थ पॉलिसी के लिए क्यों अहम है स्टडी?
भारत में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के तहत हेल्थ टेक्नोलॉजी को सिर्फ इलाज के नजरिए से नहीं, बल्कि उसके आर्थिक असर के नजरिए से भी देखना जरूरी है. रिसर्चर्स के मुताबिक, HTA आधारित फैसले यह समझने में मदद कर सकते हैं कि सीमित हेल्थ बजट को कहां खर्च करने से सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए अलग-अलग राज्यों, बड़े लेवल और लंबे समय तक ऐसी स्टडी करने की जरूरत है. रिसर्चर्स ने सुझाव दिया है कि आगे बड़े स्केल पर ऐसी स्टडी की जाएं, ताकि भारत में हेल्थ पॉलिसी से जुड़े फैसले ज्यादा ट्रांसपेरेंट, डेटा-बेस्ड और कॉस्ट-इफेक्टिव बनाए जा सकें.

देवेश कुमार पांडेय
देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है. साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.
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