July 12, 2026

1 साल में 1300% रिटर्न, ऑफिस की जगह फोटोकॉपी शॉप: पेनी स्टॉक्स वाली 6 कंपनियों की पड़ताल; काम बंद, प्लांट की जमीन पर जंगल

सिर्फ एक साल में 130 से 1300% तक रिटर्न। 8 से 10 रुपए का शेयर कुछ ही महीनों में 100 रुपए के पार पहुंच गया। दैनिक भास्कर की टीम ने शेयर बाजार में लिस्टेड और भरपूर मुनाफा देने वाली गुजरात की ऐसी 6 कंपनियों की पहचान की और उनके रजिस्टर्ड पते पर पहुंची। व

.

इन सभी कंपनियों के रजिस्टर्ड ऑफिस और कुछ के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट गुजरात में ही हैं। बाजार की भाषा में जिन शेयरों को पेनी स्टॉक कहा जाता है, उनमें संदिग्ध तरीके से भारी उतार-चढ़ाव दिखा। इन कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग में भी चौंकाने वाले बदलाव दिखे हैं।

स्टॉक मार्केट के डेटा का एनालिसिस करने वाली वेबसाइट Screeners से मिले आंकड़ों को देखने के बाद कई सवाल खड़े हुए। इस इन्वेस्टिगेशन में जो पता चला, वह शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले छोटे-बड़े निवेशकों के लिए जानना और समझना जरूरी है। हो सकता है कि इन कंपनियों के शेयर आपके पोर्टफोलियो में भी हों। ऐसा होने पर आपकी कमाई जोखिम में पड़ सकती है।

1. सप्तक केमिकल: ऑफिस की जगह फोटोकॉपी की दुकान

एक साल में निवेशकों का पैसा 1300 गुना करने वाली कंपनी सप्तक केमिकल का रजिस्टर्ड ऑफिस आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, तीर्थस्थान डाकोर के मोहन चेंबर कॉम्प्लेक्स में है। कागजों पर यह केमिकल कंपनी है, लेकिन मोहन चेंबर की दुकान नंबर-3 पर पहुंचते ही हैरानी हुई। वहां न कोई कॉर्पोरेट ऑफिस था और न ही फैक्ट्री। वहां 'चामुंडा जेरॉक्स' नाम की एक दुकान थी, जो बंद मिली।

बोर्ड पर लिखे नंबर के आधार पर दुकान के मालिक जिग्नेश भावसार से संपर्क किया गया। वे मौके पर पहुंचे और सप्तक केमिकल्स के बारे में जो जानकारी दी, उसने एक अलग तस्वीर सामने रख दी।

जिग्नेशभाई ने बताया, ‘वे लोग कभी यहां आते नहीं थे। करीब 5 साल बाद बार-बार सरकारी जांच होने लगी, तो मैंने जगह देने से मना कर दिया। इसके बाद किराया भी बंद हो गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में आज भी यही पता दर्ज है। करीब छह महीने पहले दिल्ली से भी अधिकारी जांच के लिए आए थे।’

सवाल यह है कि जिस कंपनी के ऑफिस की जगह 8×8 फीट की फोटोकॉपी की दुकान हो, जहां कोई कर्मचारी नहीं हो, कोई कारोबार नहीं हो, वह कंपनी एक साल में 1300% का रिटर्न कैसे दे सकती है? आखिर एक केमिकल कंपनी का ऐसा कौन-सा बिजनेस मॉडल है।

इतना ही नहीं, पिछले एक साल में कंपनी के प्रमोटरों ने भी अपने हिस्से के शेयर बेचना शुरू कर दिया है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर करीब 12.5% रह गई है। बाकी हिस्सेदारी आम शेयरधारकों के पास है।

यह तो सिर्फ शुरुआत थी। हमारी टीम जैसे-जैसे गुजरात के अलग-अलग जिलों में दूसरी कंपनियों के ऑफिस और प्लांट के पते पर पहुंची, नए खुलासे होते गए। हमारी लिस्ट में अगली कंपनी थी उमिया ट्यूब्स।

2. उमिया ट्यूब्स: ट्यूब बनाने वाली कंपनी के पते पर जंगल

कंपनी के रजिस्टर्ड प्लांट का पता साबरकांठा जिले के तलोद के पास तोरणिया गांव का था। उम्मीद थी कि यहां ट्यूब बनाने का बड़ा प्लांट होगा, जहां भारी मशीनरी भी देखने को मिलेगी। मौके पर पहुंचने के बाद लगा जैसे रास्ता ही गलत आ गए हों। वहां कोई फैक्ट्री नहीं थी।

आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि जिस वीरान जमीन पर कांटेदार झाड़ियां और बबूल उगे हुए थे, इसी जमीन पर कागजों में उमिया ट्यूब्स का प्लांट दर्ज है।

यहां से हमारी टीम कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पहुंची। गांधीनगर के सेक्टर-11 में बने ऑफिस के बाहर कंपनी का छोटा सा बोर्ड लगा था, लेकिन शटर पर ताला मिला। ऑफिस का बड़ा हिस्सा पार्टीशन करके किसी और को ऑफिस के लिए किराए पर दिया गया था।

उमिया ट्यूब्स लिमिटेड का ऑफिस गांधीनगर के सेक्टर-11 में है, जहां सिर्फ एक कागज पर कंपनी का नाम लिखा हुआ मिला। ऐसा लगा कि यह ऑफिस लंबे समय से बंद है।

उमिया ट्यूब्स लिमिटेड का ऑफिस गांधीनगर के सेक्टर-11 में है, जहां सिर्फ एक कागज पर कंपनी का नाम लिखा हुआ मिला। ऐसा लगा कि यह ऑफिस लंबे समय से बंद है।

प्रमोटरों ने तीन साल में 46% शेयर बेचे

पास के ऑफिस में मौजूद एक शख्स से इस बारे में सवाल किया। उसने कहा कि ऑफिस और प्लांट कहीं और शिफ्ट हो गए हैं, लेकिन डॉक्युमेंट अब भी यहीं आते हैं। अब इस कंपनी के शेयर में आए संदिग्ध बदलाव को नीचे दिए गए ग्राफिक्स के जरिए समझिए।

फिलहाल उमिया ट्यूब्स में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर करीब 4% रह गई है, जबकि लगभग 96% शेयर आम निवेशकों के पास हैं। सितंबर 2023 में प्रमोटरों की हिस्सेदारी करीब 50% थी। ऐसे में ढाई साल के भीतर इतना बड़ा बदलाव आखिर क्यों आया? जब प्लांट और रजिस्टर्ड ऑफिस के नाम पर कुछ भी नहीं मिला, तो यह कंपनी शेयर बाजार में करीब 175% का रिटर्न कैसे दे रही है, यह एक गंभीर सवाल है।

3. संगीनीता केमिकल्स: सिक्योरिटी गार्ड ने बताया, प्लांट तीन महीने से बंद

संगीनीता केमिकल्स का प्लांट गांधीनगर जिले के छत्राल GIDC फेज-4 में है। वहां पहुंचने पर पिछली दो कंपनियों की तरह ही मेन गेट पर ताला लटका मिला। पास ही एक दुकान थी। कंपनी के बारे में पूछने पर दुकानदार ने बताया कि कंपनी कुछ समय पहले ही बंद हो चुकी है। कैंपस के अंदर सिर्फ एक सिक्योरिटी गार्ड था। उसने भी कहा कि कंपनी का प्लांट पिछले तीन महीनों से बंद है। यहां कोई कामकाज नहीं हो रहा।

ऑफिस में 4-5 कर्मचारी, अधिकारी बोले- 10 दिन बाद आना

इसके बाद टीम गांधीनगर के सेक्टर-11 में कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस पहुंची। वहां चार-पांच कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन मुख्य चेंबर खाली था। कर्मचारियों ने कंपनी के कामकाज से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

यह वीडियो संगीता केमिकल के ऑफिस के अंदर का है। जहाँ चार से पांच लोग बैठे थे। उन्होंने कंपनी या अपने काम के बारे में एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

यह वीडियो संगीता केमिकल के ऑफिस के अंदर का है। जहाँ चार से पांच लोग बैठे थे। उन्होंने कंपनी या अपने काम के बारे में एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

स्टाफ ने हमारी बात अपने एक सीनियर अधिकारी से फोन पर कराई। हमने कंपनी की मौजूदा स्थिति के बारे में सवाल किए। फोन पर बात करने वाले अधिकारी ने कहा, ‘फिलहाल इस पर बात नहीं कर सकता। आप 10 दिन बाद आइए।’ इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने उस अधिकारी का नंबर भी नहीं दिया।

ध्यान देने वाली बात यह है कि छत्राल में संगीनीता केमिकल्स का प्लांट बंद है। कंपनी की तिमाही बिक्री में 29.36% की गिरावट दर्ज हुई है, इसके बावजूद शेयर बाजार में इसका शेयर लगातार ऊपर जा रहा है। वहीं प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी घटकर सिर्फ 25% रह गई है। पहले यह करीब 60% थी।

4. AVI पॉलिमर्स: दरवाजे पर ताला और मकड़ी के जाले

कागजों में AVI पॉलिमर्स का ऑफिस अहमदाबाद के पॉश इलाके वस्त्रापुर के नालंदा कॉम्प्लेक्स में दर्ज है। हमारी टीम वहां पहुंची तो ऑफिस के गेट पर मकड़ी के जाले लगे थे। पहली नजर में ही ऐसा लगा कि यह ऑफिस कई साल से नहीं खुला है। दरवाजे पर एक पर्ची लगी थी, जिस पर लिखा था कि यहां आने वाले सभी दस्तावेज ऑफिस नंबर-96 में जमा कराएं। इसके बाद हमारी टीम ऑफिस नंबर-96 पहुंची।

वहां मौजूद स्टाफ ने हमें ग्राहक समझते हुए पूछा, ‘क्या आप ऑफिस किराये पर लेने आए हैं।’

हमने कंपनी के बारे में पूछा तो उन्होंने मालिक का मोबाइल नंबर दिया। मालिक से बात हुई तो उन्होंने कंपनी के बारे में चौंकाने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘यह कंपनी तो काफी समय पहले बंद हो चुकी है।’

कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी सिर्फ 1% के आसपास रह गई है, यानी मालिक लगभग पूरी तरह कंपनी से बाहर निकल चुके हैं। इसके बावजूद रिकॉर्ड में कंपनी का तिमाही लाभ (प्रॉफिट वैरिएशन) 1283.78% दर्शाया गया है और शेयर ने 143.45% का रिटर्न दिया है।

5. केस्टोरा एग्री: एक ही पते पर दो-दो कंपनियां

अहमदाबाद के नवरंगपुरा स्थित निर्माण कॉम्प्लेक्स में केस्टोरा एग्री कमोडिटीज का ऑफिस होने का जिक्र आधिकारिक दस्तावेजों में है। हमारी टीम वहां पहुंची तो ऑफिस के बाहर लगे बोर्ड पर केस्टोरा एग्री के साथ बड़े अक्षरों में हरिगोपाल स्टील एंड मेटल प्राइवेट लिमिटेड का भी नाम लिखा मिला। ऑफिस पर ताला भी लगा हुआ था।

आसपास के लोगों ने बताया कि यह ऑफिस रेगुलर कभी खुलता ही नहीं। एग्री कमोडिटीज के नाम से चल रही इस कंपनी की तिमाही बिक्री (क्वार्टर सेल्स वैरिएशन) शून्य है, यानी कोई नया कारोबार नहीं हो रहा। इसके बावजूद शेयर बाजार में इसका शेयर लगातार तेजी से बढ़ रहा है।

केस्टोरा एग्री के शेयरों से प्रमोटरों ने भी बनाई दूर

सितंबर 2023 में केस्टोरा एग्री कमोडिटीज लिमिटेड में पब्लिक शेयरहोल्डिंग करीब 73% और प्रमोटर होल्डिंग लगभग 26% थी। मार्च 2026 तक स्थिति पूरी तरह बदल गई। प्रमोटरों ने ज्यादातर हिस्सेदारी बेच दी और उनके पास सिर्फ 5% शेयर बचे। वहीं 94% से ज्यादा हिस्सेदारी आम शेयरधारकों के पास पहुंच गई।

6. गुरुकृपा जेम्स: लिस्ट में सिर्फ एक कंपनी, जहां कामकाज सामान्य मिला

इस लिस्ट में सिर्फ गुरुकृपा जेम्स ऐसी कंपनी थी, जिसका अहमदाबाद के आश्रम रोड स्थित चार मंजिला ऑफिस चलता हुआ मिला। वहां कर्मचारी काम करते हुए दिखाई दिए। ग्राउंड रियलिटी में सब कुछ सामान्य लगा। हालांकि वहां से जानकारी मिली कि कंपनी का नाम बदलकर अब भक्ति ज्वेल्स कर दिया गया है। इसके बावजूद शेयर बाजार में कंपनी का नाम गुरुकृपा जेम्स ही है।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सितंबर 2023 में कंपनी में प्रमोटर होल्डिंग करीब 40% थी, जो अब घटकर 9.76% रह गई है। वहीं तिमाही मुनाफे में 84.66% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद कंपनी के शेयर ने एक वर्ष में 209.32% का रिटर्न दिया है।

अब निवेशकों को क्या समझना चाहिए…

शेयर बाजार की सामान्य धारणा है कि जिस कंपनी के भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद होती है, उसके प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर रखते हैं। यहां जिन छह कंपनियों की जांच की गई, उनमें लगातार प्रमोटर होल्डिंग घटती दिखाई दे रही है। AVI पॉलिमर्स में तो यह घटकर केवल 1.11% रह गई है। इसका सीधा अर्थ यही है कि प्रमोटरों ने अपने ज्यादातर शेयर या तो आम निवेशकों को बेच दिए हैं या फिर ऑपरेटरों के पास पहुंच गए हैं।

मुनाफा और शेयर की चाल, दोनों में मेल नहीं

सप्तक केमिकल का मुनाफा आधा रह गया। केस्टोरा एग्री का मुनाफा 84.72% घट गया। इसके बावजूद इन कंपनियों के शेयरों के भाव लगातार ऊंचाई पर बने हुए हैं। यह सामान्य बाजार सिद्धांत के बिल्कुल उलट स्थिति है।

इतना ही नहीं, ये सभी माइक्रो-कैप कंपनियां हैं। ऐसी छोटी कंपनियों में ऑपरेटरों के लिए शेयर की कीमतों को मनचाहे तरीके से ऊपर या नीचे ले जाना आसान माना जाता है।

इस इन्वेस्टिगेशन से यह स्पष्ट होता है कि ग्राउंड लेवल पर इन कंपनियों की ओर से किसी बड़े प्रोडक्शन या सक्रिय कारोबारी गतिविधि के पर्याप्त संकेत नहीं मिले। सामान्य निवेशक 100% से ज्यादा रिटर्न देखकर लालच में आकर इन शेयरों की खरीदारी करते हैं, तब कुछ ‘समझदार लोग’ ऊंचे भाव पर अपने शेयर बेचकर मुनाफा वसूल लेते हैं। बाजार की भाषा में इसे डंपिंग कहा जाता है।

इसके बाद यदि शेयर में लगातार लोअर सर्किट लगने लगें तो आम निवेशकों की पूंजी फंस सकती है। ऐसी स्थिति में शेयर बेचने के लिए खरीदार तक नहीं मिलते और निवेशकों का पैसा लंबे समय तक अटकने या डूबने का जोखिम बना रहता है।

दैनिक भास्कर ने 29 जून 2026 को इन सभी छह कंपनियों को ई-मेल भेजकर उनके शेयरों में दिखाई दे रहे असामान्य रुझान पर आधिकारिक जवाब मांगा था। 10 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद किसी भी कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया।

हमने शेयर बाजार की गतिविधियों पर निगरानी रखने वाली संस्था SEBI को भी आधिकारिक ई-मेल आईडी पर इन कंपनियों के शेयरों में दर्ज असामान्य तेजी के बारे में जानकारी भेजी गई और पूछा गया कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जा सकती है। SEBI की ओर से ऑटो-जनरेटेड जवाब मिला, जिसमें कहा गया कि इस तरह की शिकायत संबंधित कंपनी के शेयरधारक ही दर्ज करा सकते हैं।